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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Friday, 8 June 2012

पद्य - ७‍१ - गर्मी – छुट्टी (बाल गीत)


गर्मी – छुट्टी
(प्रवासी मैथिल धिया – पुताक नजरि सँ)
(बाल गीत)







आबि  रहल  छै  गर्मी – छुट्टी,
जयबै  हम  सभ  गाम ।
कऽलम - गाछी - पोखरि घुमबै,
घुमबै   खेत - खरिहान ।।



अप्पन  तुरिया   नेना – भुटका,
गामक   संगी  –  साथी ।
बाबा – बाबी,    भैय्या – भौजी,
भेटथिन्ह कक्का – काकी ।
संगतुरिया सभ भाए – बहिन संग,
घुमबै  अङ्गना - दलान ।
आबि  रहल  छै ......... ।।



कहियो फलना केर हकार,
कहियो चिलना केर भोज ।
कहियो किर्त्तन – अष्टयाम,
नाटक – नौटंकीक जोश ।
राति–राति भरि जागि–जागि कऽ,
रामलीला      लए     जान ।
आबि  रहल  छै ......... ।।



अन्हर – बिहारि,   उठलै   बिर्रो,
चल बीछए आमक टिकुला ।
के    सुनैछ    आ    के     डरैछ,
    की भूत साँप आ ठनका ।
बैर जिलेबी  - बड़हर - कटहर,
   जामुन –  आम   - लताम ।
   आबि  रहल  छै ......... ।।



उपनयनक  धमगज्जरि  कत्तहु,
कतहु     अबैछ     बरियाती ।
मूड़न – जाग - दुरागमन देखी,
कतहु     बनी     सरियाती ।
कतहु पमरिया नाचि रहल अछि,
भगता             ब्रम्हस्थान ।
आबि  रहल  छै ......... ।।



कजरी  - लगनी बटगवनी,
   बाबा   केर    नचारी ।
भोरे – भोरे     गीत     पराती,
गाबथि     बुढ़िया     दादी ।
कतहु गीत सलहेशक गाबथि,
सोहर        समदाओन ।
आबि  रहल  छै ......... ।।




डॉ॰ शशिधर कुमर "विदेह"                                  
एम॰डी॰(आयु॰) कायचिकित्सा                                   
कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एण्ड रिसर्च सेण्टर, निगडी प्राधिकरण, पूणा (महाराष्ट्र) ४११०४४,






“मिथिलांचल टुडे” मैथिली द्वैमासिक पत्रिका मे प्रकाशित ।

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