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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Tuesday, 25 April 2017

पद्य - २३७ - आइ आबए बला रिजल्ट छै (बाल कविता)

आइ आबए बला रिजल्ट छै (बाल कविता) 





आइ  आबए  बला  रिजल्ट छै ।
आइ  दिन  बड़ी डिफिकल्ट छै ।
की करियै - किछु  फुरा रहल ने,
आइ  ने  कोनो  विकल्प  छै ।।

जएह लिखलियै,  खूब लिखलियै ।
सभ पन्नाकेँ भरि - भरि देलियै ।
तइयो  आइ  बड़  डऽर   लगैए,
छपने   केहेन   रिजल्ट   छै !!

कोनो  चीजमे  मोन ने लागए ।
कछमछ मोन  उताहुल भागए ।
इण्टरनेट  अछि देखा रहल बस,
आबए  बला   रिजल्ट  छै ।।

कहुखन  मोनेँ  टॉप  करै छी ।
कहुखन सभसँ  फ्लॉप करै छी ।
आइ  तराजू  केर  पलड़ा सनि,
डगमग  दृढ़   संकल्प   छै ।।


30 JULY 2015 कऽ प्रकाशनार्थ मिथिला दर्शन केर सम्पादकीय कार्यालयकेँ प्रेषित ।
मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍224म अंक (‍15 अप्रील 2017) (वर्ष 10, मास 112, अंक ‍224) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।


पद्य - २३६ - छोट माँछ, पैघ माँछ (बाल कविता)

छोट माँछ, पैघ माँछ (बाल कविता)






छोट माँछ,  पैघ माँछ,  ताहूसँ  पैघ  माँछ,
कक्कर आहार के ? – बुझिते छी भाइ यौ ।
दुनिञाक  इएह  नियम,  सदिखनसँ आबैए,
बेसी हम की कहू - बुझिते छी  भाइ यौ ।।

जिनगी  संघर्ष  छिऐ,  सएह  आदर्श  छी,
विश्वक  विचित्र  संकल्पना छी  भाइ यौ ।
हर  कण  निर्जीव जे,  वा  हो  सजीव जे,
करइछ संघर्ष नित, अस्तित्वक, भाइ यौ ।।

मानी  ने  मानी अहँ,  संघर्षे  सत्य  छी,
शान्तिक विचार  बस सपना छी भाइ यौ ।
जतबा   प्रकृतिकेँ,   हमसब  जनैत  छी,
अस्तित्वक इएह  संकल्पना छी भाइ यौ ।।

जल थल बसात नभ, अस्तित्व लेल निज,
करइछ प्रयत्न नित, बुझले छी भाइ यौ ।
अपना अस्तित्वकेँ जञो नञि बचाए सकी,
सहअस्तित्व तखन सपना छी भाइ यौ ।।


मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍224म अंक (‍15 अप्रील 2017) (वर्ष 10, मास 112, अंक ‍224) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।





पद्य - २३५ - पटना पुस्तक मेला (बाल कविता)


पटना पुस्तक मेला (बाल कविता)

पटनाक पहिल पुस्तक मेलासँ किनल किछु सोवियत पोथीसभ - रादुगा, मीर ओ प्रगति प्रकाशनक पोथीसभ


आइ गेल छलहुँ  पुस्तक मेला,
पटनाक   गान्धी   मैदानमे ।
नञि विशेष किछु  छल तइयो,
नव  पोथीक  अनुसन्धानमे ।।

याद आबैछ  एखनहु  ओहिना,
पटनाक  पहिल पुस्तक मेला ।
पोथी  सभहक  अम्बार   बेस,
आ लोक सभक रेला - ठेला ।।

मीर,  रादुगा,  प्रगति प्रकाशन,
सोवियतक   पुस्तक  आगार ।
ऑक्सफोर्ड, प्रैण्टिस आ कैम्ब्रिज,
एन॰बी॰टी॰, सी॰एस॰आइ॰आर॰ ।।

हरेक विषय पर  छल  पुस्तक,
भाषा, इतिहास, भूगोल  रहए ।
अभियंत्रन, वाणिज्य, चिकित्सा,
ज्योतिष, धर्म, खगोल  रहए ।।

बहुबिध  देसी  आओर  बिदेसी,
पुस्तक   केर   स्टॉल  रहए ।
मैथिलीक  सेहो  एक - दू  टा,
नीक  छोट   स्टॉल   रहए ।।

सोचल    आगाँ   धीरे - धीरे,
मैथिलीक    स्टॉल    बढ़त ।
ई  तँऽ   पहिलुक  बेर  थिकै,
आगाँ  बढ़िञा माहौल  रहत ।।

एहनहु  बरख   रहल  जहिया,
छल नामहि केर पुस्तक मेला ।
पाटलीपुत्र    मैदान    फिरल,
भेल  दूसल्ला  पुस्तक मेला ।।

कतोक  प्रकाशन   बन्न  भेल,
अन्तर्जालक  ई  युग आएल ।
थिक  उदासीन  सरकार  सेहो,
राज्यक भाषा सभ बौआएल ।।

युवा ई मेला - चौबीस बरखक,
वृद्ध  सनक  लागैत  अछि ।
पुस्तक मेलाक  शिशु अवस्था,
याद  बहुत  आबैत  अछि ।।

2017 ई॰क पटना पुस्तक मेलामे मैथिली द्वार तँऽ छल मुदा मैथिली पोथीक स्टॉल नञि । शायद एही द्वार बाटे मैथिली पोथीसभ भागि गेल होयत !!!




मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍224म अंक (‍15 अप्रील 2017) (वर्ष 10, मास 112, अंक ‍224) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।


Monday, 24 April 2017

।। कलर्स टी॰ वी॰ राइजिंग स्टार - मैथिली ठाकुर।।

।। कलर्स टी॰ वी॰ राइजिंग स्टार - मैथिली ठाकुर।।




            काल्हि अर्थात २३ अप्रील २०१७, रविदिन कऽ जे किछु भेल तकर प्लॉट तँऽ सही रूपसँ आइसँ ८ दिन पहिनहि लिखा गेल छल जहिया विक्रमजीत केँ बाइपास करैत मैथिली डाइरेक्ट फिनाले मे पहुँचाए देल गेलीह । सभ खुश छल, मुदा हमरा मुँहसँ निकलल - मैथिली हारि गेलीह । हमर कनिञा पुछलन्हि - एना किएक बजैत छी ? हम कहलिएन्ह जे नीक रहैत कि जनमतक अनुसार विक्रमजीतकेँ फिनालेक डाइरेक्ट टिकट भेटितन्हि आ मैथिली सेकेण्ड फाइनलिस्ट भए पहुँचितथि । विक्रमजीतक संग जे आइ भेल से वा ताहि तरहक कोनहु बात कहीं मैथिलीक संग फाइनलमे ने हो - सशंकित मुदा दृढ़ताक संग हम कहलिएन्हि । ओ कहलन्हि अहाँकेँ एनाहितहि शंका होइत अछि । अस्तु ‍१ सप्ताह बीति गेल आ परिणाम सामने अछि ।

परिणाम जे हो मुदा एहि संदर्भमे किछु बात स्पष्ट भेल -

                        (१)॰            पहिल तँऽ मैथिलीक गायन प्रतिभा उत्कृष्ट कोटिक अछि आ से प्रतिभा विश्वक सामने उजागर भेल । मैथिलिकेँ भारतहि नञि अपितु भारतसँ बाहरक सपोर्ट सेहो भेटलन्हि । भारतक हर स्थानसँ मैथिलक ओ आन सहृदय भाषा - भाषीक सपोर्ट मैथिलीकेँ भेटलन्हि । NRI मैथिल लोकनि सेहो मैथिलीक पक्षमे वोटिंग कएलन्हि (हलाँकि NRI मैथिलक लॉबी आन NRI सभहक लॉबीक अपेक्षा नगण्य अछि)  ।

                        (२)॰            मैथिली जाहि स्थान धरि पहुँचलीह से अपन वास्तविक पहिचानक संग, नञि कि बिहारी वा डेलहाइटक छद्म पहिचानक संग । मैथिली सदैव मिथिलावासी ओ मैथिलीभाषी होयबाक पहिचान अपना संग रखलीह । किछु लोकक मानब छन्हि जे जँ मैथिली छद्म पहिचान धारण करितथि तँऽ ओ जीति जइतथि । हमर कहब अछि जे ई धारणा निराधार अछि, कारण एहिसँ पहिनहु किछु लोक अपन असली पहिचान नुकाए जीत प्राप्त करबाक असफल प्रयास कए चुकल छथि । हमरा जनैत, हारि केर डऽरसँ अपन वास्तविक पहिचान नुकाएब वा छद्म पहिचान धारण करब तँऽ सभसँ पैघ हारि अछि ।

                        (३)॰            मैथिलीक वोट प्रतिशतमे बादमे आयल कमी सपोर्ट केर कमी नञि अपितु मैथिलीक प्रति भेल निगेटिव वोटक कमाल छी । मैथिल लॉबीक किछु लोक सेहो एहि तरहक वोटिंग कएलन्हि मुदा से आन लॉबीक निगेटिव वोटिंगक तुलनामे नगण्य छल । कारण मिथिलामे एखनहु लोक व्यापक रूपमे निगेटिव वोटिंग करबाक पक्षमे नञि रहैत छथि । हुनिकर सभक मानब रहैत छन्हि जे निगेटिव वोटिंग करब पापक भागी बनब थिक ।

                        (४)॰            एकर अतिरिक्त निर्णयक आन बहुत किछु झाँपल प्रक्रिया होइत छै जे हमरा सभक बुद्धिसँ परे अछि, तेँ एहि ठाम ओकर सभक चर्च नञि करब ।

       ओना तँऽ प्रायः हम कोनहु नऽव कलाकारक विषयमे नञि लिखैत छी, मुदा पछिला ३ महीना (‍१२ सप्ताह) हमरा लिखबाक लेल बाध्य कएलक । किछु बात इण्टरनेटक माध्यमसँ मैथिली धरि पहुँचाबए चाहब (ओना ताहि बातकेँ सुनब वा नञि सुनब हुनिका पर निर्भर करैत छन्हि, सुनबाक बाध्यता नञि अछि) -

                        (१)॰            एक विशिष्ट सीमा धरि पहुँचलाक बाद एकटा नीक कलाकारकेँ एहि प्रकारक हारि - जीतसँ कोनहु विशेष फर्क नञि पड़ैत छै आ अहाँ ओहि सीमाकेँ पार कए चुकल छी ।

                        (२)॰            जीत - हारि जिनगीक सतत प्रक्रिया थिक जे हमेशा संग चलैछ तेँ सतत आगाँ बढ़बाक प्रयास करैत रही ।

                        (३)॰            अपन माए-बाप, मातृभाषा ओ मातृभूमिक पहिचान देब कथमपि गलत नञि होइछ आ तेँ अहाँ गलती नञि कएलहुँ ।

                        (४)॰            अहाँक अन्तिम प्रस्तुतिक बाद श्री शंकर महादेवनजी जे कहलन्हि से अनुकरणीय । मैथिलीक संग आनहु भाषासभ ओ विभिन्न प्रकारक मंचसभ पर गाउ, आन भाषा ओ आन तरहक गायकी सेहो सीखू । अपन मातृभाषा ओ मातृभूमिक पहिचानक संग आन भाषासभ मे गायन कथमपि अनुचित नञि थिक ।

                        (५)॰            स्व॰ महेन्द्र कपूरजीक पहिचान पंजाबी भाषीक रूपमे आ श्रीमति सुमन कल्याणपुरजीक पहिचान मराठी भाषीक रूपमे अछि । मुदा दूनू गोटे मैथिली फिल्म ममता गाबए गीत मे जे गीत सभ गओलन्हि से अमर अछि । एखनहु बेर बेर सुनबाक इच्छा करैत अछि ।


        अन्तमे मैथिलीक उज्ज्वल भविष्यक कामनाक संग अनियमितताक रहितहुँ कलर्स टी॰ वी॰ राइजिंग स्टार टीम ओ तीनू जज लोकनिकेँ बहुत बहुत धन्यवाद ।