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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Saturday, 2 November 2019

मिथिलाक "छठि" (छइठ, छैठ, छठी) आ बिहारक "छठ"मे अन्तर

मिथिलाक "छठि" (छइठ, छैठ, छठी) आ बिहारक "छठ"मे अन्तर




मिथिलाक "छठि" (छइठ, छैठ, छठी) आ बिहारक "छठ"मे समानता रहितहुँ बड़ असमानता छै :—

(१). मिथिलाक छठि एक बेर ठनलाक बाद प्रायः जिनगी भरि आ पुस्त-दरि-पुस्त चलितहिं रहैत अछि जखनि कि बिहारक छठ मनमर्जी अछि (मोन भेल तऽ एहि बेर कएलहुँ, अगिला बेर नञि आ फेर चारि साल बाद कऽ लेलहुं) ।

(२). मिथिलाक पवनैतिनक जँ कोनहु कारणसँ (अस्वस्थता, प्रसव आदि कारणसँ) उपास वा स्वयं पानिमे ठाढ़ भऽ हाथ उठाएब एक बेरि छूटि गेल तऽ प्रायः ओ उपास वा पानिमे ठाढ़ भऽ हाथ उठाएब दोबारा शुरू नञि होइछ मुदा अर्घ तइयो चलितहिं रहैत अछि, केओ दोसर गोटे हाथ उठा दैत छथिन्ह । बिहारमे एना नञि ।

(३). जन्माशौच, छुतका आदि भेला पर सेहो अर्घ पड़ितहिं टा अछि, भलहि भगिनमानहि केर आङन मे बनओ आ हाथ उठओ ।

(४). मिथिलामे अर्घ (अर्घ्य) केर संख्या घटैत नञि अछि, हरेक साल स्थिर रहैत अछि या बढ़ैत अछि आ एक बेरि बढ़ि गेलाक बाद घटैत नञि अछि । बिहारमे से नञि, मनमर्जी छै ।

(५). मिथिलाक छठिमे सांझुका ओ भोरुका अर्घक सामिग्री (ठकुआ, बुकबा/भुसबा आदि) एक्कहि रहैत अछि, जखनि कि बिहारक छठमे दूनू अर्घक लेल अलग-अलग पकवान बनैत अछि (जनतब देलन्हि - फेसबुक मित्र श्री मिथिलेश कुमार झाजी, कोलकातासँ) । ओना हमरा जनैत मिथिलाक ओ भाग जे पछिला 70-80 वर्षसँ केन्द्रीय मिथिलाक अपेक्षा पटना (मगध) ओ छपरा पट्टीसँ (छपरा, सीवान, गोपालगंजसँ) बेसी सम्पर्कमे रहल ओहि ठाम सेहो बिहारहि जेकाँ साँझुका ओ भोरुका अर्घक लेल अलग-अलग पकवान बनएबाक परम्परा आबि गेल अछि । मिथिलामे  भोरूका अर्घमे सांझुक अर्घक अपेक्षा दहीक अतिरिक्त समावेश रहैत अछि ।

(६). देवघरक मैथिल समाजमे छठि नञि मनाओल जाइत अछि (जनतब देलन्हि - फेसबुक मित्र श्री गंगानन्द झाजी, देवघरसँ) ।




Wednesday, 23 October 2019

लव यू दुल्हिन (फिल्मक समीक्षा हमरा नजरिसँ)

लव यू दुल्हिन (फिल्मक समीक्षा हमरा नजरिसँ)


        “लव यू दुल्हिन” — लोकसभ कहि रहल छथि जे मल्टीप्लेक्स धरि पहुँचएबला ई पहिल मैथिली सिनेमा अछि । हम कहब जे मल्टीप्लेक्स धरि पहुँचि कऽ तीनि दिन दूटा हॉलमे हाउसफुल चलएबला ई पहिल मैथिली सिनेमा अछि । एहिसँ पहिने “ललका पाग” पटनाक पी. एन. मॉलकेर मल्टीप्लेक्समे लागि चुकल छल मुदा चलि नञि सकल ।





       फिल्मक पटकथा मध्यवर्गीय ग्रामिण मैथिल परिवारक अछि । नायक कोसी कातक छथि तऽ नायिका कमला-जीवछक बीचक । समएकेर नप्पा अर्थात टाइम स्केल पर पटकथाक गति सुस्त नञि अपितु कनेक तेज अछि । पिपनी मिलमिलबितहि सालक साल बीति जाइत अछि जे कि कथाक स्वभाविक प्रवाहक अनुरुपहि अछि । वास्तवमे कोनहु साहित्य वा सिनेमा दू टा विपरीत ध्रुव या धूरीक बीच तर-तम भावसँ विचरैत रहैत अछि । ओहि दूनू ध्रुव या धूरीक नाँओ अछि — “यथार्थ” ओ “कल्पना” । जे सिनेमा “यथार्थ” नामक धूरीक जतेक लगीच होएत से ओहि सिनेमाक पटकथामे वर्णित समाजक ओतबहि सूक्ष्म ओ स्टीक वर्णन करत । एहेन सिनेमाकेँ पटकथामे वर्णित समाजक ऐना या दर्पण कहल जाइत अछि । मुदा दुर्भाग्यसँ एहेन सिनेमा बॉक्स ऑफिसक बेसी सीढ़ी नञि चढ़ि पाबैत अछि आ निर्माणकर्ताकेँ विमुख कऽ दैत अछि । जँ कोनहु निर्माणकर्ता एहेन फिल्म बनबितहु छथि तऽ ओहि सिनेमाकेँ वितरक नञि भेटैत अछि आ फिल्म सिनेमा हॉलक मुंह नञि देखि पाबैत अछि । दोसर धूरी अर्थात ”कल्पना”, कोनहु सिनेमाकेँ ओकर पटकथामे वर्णित समाजक यथार्थसँ दूर कऽ दैत छैक । एहेन सिनेमा प्रायः लहक-चहक ओ मनोरञ्जनसँ परिपूर्ण रहैत छैक । प्रायः नीक धनोपार्जन करैत अछि मुदा किछु दर्शकक शिकायत रहैत छन्हि जे एहि तरहक सिनेमा समाजकेँ गलत चित्रित करैत अछि, से प्रायः उचितहि, मुदा हमरा अनुसारेँ एक सीमा धरि मात्र । प्रायः एकटा नीक ओ सफल सिनेमा वा साहित्य एहि दूनू ध्रुवक बीचमे रहैत अछि — दूनू ध्रुवक गुण-अवगुणकेँ उचित अनुपातमे समाहित कएने । “लव यू दुल्हिन” सेहो एकटा एहनहि फिल्म अछि, दूनू ध्रुवक बीचक फिल्म । एहि फिल्म केर गीतसभमे लहक-चहक केर बेस पुट छैक आ तेँ किछु दर्शकक आरोप छन्हि जे ई मैथिली फिल्मक भोजपूरीकरण थिक, ई चलचित्र मैथिल समाजकेँ चित्रित नञि करैत अछि । मुदा हमरा अनुसारेँ ई आरोप उचित नञि । ई फिल्म पूर्ण रूपसँ मैथिल समाजहिकेँ प्रदर्शित करैत अछि । फिल्मक पटकथा पूर्णतया मैथिल समाजक थीक । जाहि गीतसभक फ़िल्मांकनमे अर्धनग्नताक भाव अछि, से सभ गीत कल्पना वा सपनामे गाओल गेल अछि, जे स्पष्ट कहैत अछि कि मैथिल समाजमे एहि तरहक पहिरन-ओढ़न आम नञि अछि । तथापि एकटा गीतमे साया-आँगीमे (पेटीकोट-ब्लाउजमे) नाच दर्शकक आरोपक आंशिक पुष्टि अवश्य करैत अछि आओर परिवारक संग फिल्म देखबामे व्यवधानकारक भऽ सकैछ ।
हिन्दी फ़िल्म "दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे"केर पहिल गीतमे
अभिनेत्री "काजोल"
मुदा ई भोजपूरीकरण नञि थीक, ई बॉलीवुडकेर ग्लैमरक प्रभाव थीक । जे मैथिल समाज सपरिवार हिन्दी फ़िल्म ”दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे” केर पहिल गीत देखि सकैत अछि आ ओकरा आदर्श पारिवारिक फिल्म मानि अनुकरण कऽ सकैत अछि, जाहि मैथिल समाजक सिनेमा हॉल/मल्टीप्लेक्समे भोजपुरी सिनेमा सुपर हिट होइत अछि, तकर सुआदक अनुसार देल गेल पुट छी । एहि ठाम बता दी जे ई फिल्म “अ” (U) श्रेणीक नञि अपितु “अ/व” (U/A) श्रेणीक अछि जकर मतलब होइत अछि जे 12 सालसँ कम वएसक दर्शकक लेल ओकर अभिभावकक उचित परामर्श ओ संग हएब आवश्यक।
मैथिली फिल्म "लव यू दुल्हिन"मे अभिनेता "अमिय कश्यप" आ अभिनेत्री "पूजा पाठक"




मैथिली फिल्म "लव यू दुल्हिन"मे अभिनेता "आलोक कुमार" आ अभिनेत्री "इनु श्री"

     मै सिनेमा “लव यू दुल्हिन” स्त्रीगणक मनोभावक चित्रण करबामे बहुत नीक रुपेँ सफल भेल अछि आ अपन नामक लाज रखलक अछि । कुमारि मैथिल बालाक सहज, चंचल, कोमल  मनोभाव ओ विवाहित स्त्रीक धीर-गम्भीर, व्यवस्थित, उत्तरदायी मनोवृत्ति — दूनूक प्रदर्शन बहुत नीक जेकाँ भेल अछि । नायिका, नायक ओ हुनिक परिवारक सदस्यलोकनि पारम्परिक मैथिल अवश्य छथि संगहि उचित आधुनिक विकासवादी विचारधाराक समावेशी सेहो । एहि चलचित्रक सम्बन्धमे किछु एहने सनि विचार श्रीमति शेफालिका वर्माजीक सेहो सोझाँ आएल अछि । ई फिल्म निश्चित रूपसँ एकटा नायिका प्रधान फिल्म अछि ।



मैथिली फिल्म "लव यू दुल्हिन"मे नायक "विकास झा" ओ नायिका "प्रतिभा पांडे"



       मैथिल समाजसँ जुड़ल करीब आधा दर्जन समस्याकेँ एहि फिल्ममे उठाओल गेल अछि आ तकर सम्भावित निराकरण सेहो देखाओल गेल अछि । मिथिलाक भूगोल आ बाढ़ि, अन्योन्याश्रय सम्बन्ध आ ताहूमे कोसी माए । सन् 2008 ई.मे कोसीक कुसहा बान्ह टुटबाक सामाजिक ओ राजनैतिक सम्बन्ध फिल्ममे देखाओल गेल अछि आ एकर दुखदायी पक्ष फिल्मक पटकथामे यू-टर्न आनैत अछि । फिल्ममे बाढ़िक समएमे सरकारी यन्त्रक असंवेदनशीलता, शराबबंदी, खुलामे शौच रखबा लेल शिक्षक लोकनिक नियुक्त्ति आदि पर सेहो कटाक्ष देखबा लेल भेटैछ । फ़िल्ममे बहुतहि उतार-चढ़ाव अछि तथापि फिल्म सुखान्त अछि ।

मैथिली फिल्म "लव यू दुल्हिन"में नायकक भूमिकामे "विकास झा" आओर खलनायकक भूमिकामे "अमिय कश्यप" तथा
आन सहयोगी कलाकार लोकनि





   एहि सिनेमामे राम ओ रावण अर्थात नायक ओ खलनायक दूनू पितियौत भाए रहैत छथि । दूनू गोटेक संवाद मैथिलीअहिमे अछि मुदा बजबाक टोन/बोली (PHOENETIC TONES / DIALECTS) भिन्न-भिन्न अछि । किछु लोककेँ ई उचित नञि लगलन्हि, तऽ से स्वभाविकहि । मुदा हमरा से अभाँत नञि लागल । हम मानि लेल जे दूनू पितियौतमेसँ एक नेनपनमे बेसी काल अपन मातृकहिमे रहलाह जाहि ठामक मैथिली बजबाक टोन हुनक पैतृकक मैथिलीक टोनसँ अलग छल । एहि तथ्यकेँ पटकथा लेखक ओ निर्देशक शायद समयाभावक कारण नञि देखाए सकलाह । एहि फिल्ममे मैथिली भाषाक तीनि-चारिटा टोन वा बोलीक प्रयोग भेल अछि से हमरा बहुत नीक लागल । कोनहु भाषाक साहित्य ओ सिनेमामे ओहि भाषाक विभिन्न टोन या बोलीक प्रयोग ओहि भाषाक व्यापकता ओ समृद्धिक द्योतक होइत अछि ।

       एकटा अन्त्याक्षरी गीत ओ एकटा मुजराकेँ छोड़ि एहि फिल्मक शेष सभटा गीत विशुद्ध मैथिलीमे अछि आ बहुत सुन्दर कर्णप्रिय संगीतक संग । मुजराबाली बाहरसँ बजाओल गेलि तेँ हिन्दीमे गाओलि । अन्त्याक्षरी गीत नवतूरसभ हिन्दी फ़िल्मी गीतसभक पैरोडी मैथिलीमे गाबैत अछि जकर पुर्णाहुति करैत अन्ततः मैथिली गीत “शुभे हे शुभे” गाओल जाइत अछि । बिआहसँ पहिने कनिञाकेँ हरदि लगएबाक बिध केन्द्रिय मिथिलाक मैथिल ब्राह्मणमे नञि अछि मुदा शेष मिथिलामे अछि ओ मिथिलाक आन जातिसभमे सम्पुर्ण मिथिलामे अछि, तेँ एहि आधारेँ ई बिध फिल्ममे देखाएब उचित लागल । एहि ठाम एकटा गप्प आओरहु कहि दी जे फिल्ममे नायकक गाम “तरौनी” यात्रीजीक “तरौनी” नञि अछि, कारण जे यात्रीजीक तरौनीकेँ कुसहाक बान्हि ओ कोसीक बाढ़िसँ कोनहु सम्बन्ध नञि ।
मैथिली फिल्म "लव यू दुल्हिन"मे अभिनेता "शुभ नारायण झा" ओ "अमित कश्यप" 

मैथिली फिल्म "लव यू दुल्हिन"मे चरित्र अभिनेता ओ अभिनेत्री "विजय मिश्र" तथा "मुकुल लाल"


        ई फिल्म — अभिनय ओ तकनीकक प्रयोग — दूनूमे बहुत बढ़िञा अछि । नायक, खलनायक, नायिका, सहनायिका, चरित्र अभिनेता/अभिनेत्री तथा आन सहकलकार आदि सभगोटे अपन-अपन उत्कृष्ट अभिनय क्षमताक प्रदर्शन कएलन्हि अछि । फ़िल्मांकन/छायांकन, ध्वनि मुद्रण, प्रकाश समायोजन आदि सभ बहुत नीक अछि, कतहु ध्वनि वा चित्रक अस्पष्टता नञि बुझना जाएत । निश्चित रूपेँ एहि फिल्म टीमक सभ सदस्य बेस मेहनति ओ लगनसँ काज कएलन्हि अछि । एहि फिल्ममे लीखित रूपमे जे किछु वैधानिक चेताओनी देखाओल गेल अछि से विशुद्ध मैथिली भाषामे अछि, नञि कि अंग्रेजी वा हिन्दीमे ।



        दिल्लीक विकाशपुरी आ रोहिणी केर PVR MULTIPLEX मे फिल्मकेर प्रदर्शन वास्तवमे एकटा PILOT PROJECT/EXPERIMENT छल जे आन ठाम एहि फिल्मकेर प्रदर्शनक लेल बंसीक तरेगाक काज करैत । चुँकि PILOT PROJECT सँ शुभ संकेत भेटल अछि, तेँ उम्मीद अछि जे ई फिल्म भारवर्षक मैथिलबहुल क्षेत्रमे व्यापक स्तरपर लागत ओ आगामी आन मैथिली फिल्म सभक लेल सफलताक बाट प्रशस्त करत । शुभस्तु ।

समीक्षित फिल्म — लव यू दुल्हिन (LOVE U DULHIN)
भाषा — मैथिली (MAITHILI)
केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड श्रेणी — अ/व (U/A)
बैनर — श्री रामजानकी फ़िल्म्स
निर्माता — विष्णु पाठक आओर रजनीकांत पाठक
निर्देशक — मनोज श्रीपति
अभिनेता ओ अभिनेत्री — विकास झा, अमिय कश्यप, आलोक कुमार, प्रतिभा पांडे, पूजा पाठक, इनु श्री, विजय मिश्र, मुकुल लाल, शुभनारायण झा तथा अन्य ।
गीतकार — सुधीर कुमार, विक्की झा, प्रकाश चन्द्र खां (मनोज)
संगीतकार — धनंजय मिश्र
गायक आऽ गायिका — कल्पना, इंदु सोनाली, विकास झा, आलोक कुमार, प्रियंका सिंह, देवानन्द झा





समीक्षक — डॉ. शशिधर कुमर।



Thursday, 16 August 2018

स्व. अटल बिहारी वाजपेई / वाजपेयी - श्रद्धाञ्जलि

।। स्व. अटल बिहारी वाजपेयीजी - एकटा मैथिलक सादर, विनम्र श्रद्धांजलि ।।




छलाह मंत्री - प्रधान,  बात अपना जगह ।
राजसम्मान - मान - दान,  अपना जगह ।
हम छी मैथिल, हमर मनमे हुनिकर स्थान,
राजनीतिसँ अलग,  थीक अपना जगह ।।

दल - खेमा - विपक्ष - पक्ष, अपना जगह ।
छाप छोड़ल  स्पष्ट  नीक,  अपना  जगह ।
हम छी  मैथिली अकिञ्चन,  हमर नोरपर,
ध्यान देलन्हि, से बात दीव, अपना जगह ।।

भेलै सौंसे बिकास साँच,  अपना  जगह ।
तकनीकीक बताह नाँच,  अपना  जगह ।
हम छी मिथिला,  आँचरक  फाटल नुआ,
सीबि देलन्हि ओ, भाव से, अपना जगह ।।

                  - डॉ. शशिधर कुमर "विदेह"

अकिञ्चन मैथिलीक नोर पोछब

मिथिलाक फाटल आँचरकेँ सिअब (सिउब)


"विदेह - मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका" केँ आगामी अंकमे एहि कविताक प्रकाशनक अधिकार प्रदत्त ।

Tuesday, 24 April 2018

मैथिली (मिथिलाभाषा) केर भाषायी अस्तित्व पर श्री अटल बिहारी वाजपेयीजीक विचार

।। मैथिली (मिथिलाभाषा) केर भाषायी अस्तित्व पर श्री अटल बिहारी वाजपेयीजीक विचार ।।

"मिथिला मिहिर" - 18 मइ 1975 ई.
साभार सौजन्य - श्री शरदिन्दु चौधरी (शेखर प्रकाशन, पटना)




Sunday, 15 April 2018

होली आ जुड़ि शीतल

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                                होली आ जुड़ि शीतल

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फागुनक अन्तिम दिन "सम्मत" जड़ाओल (होलिका दहन) जाइत अछि । चैतक पहिल दिन "फागु/फगुआ/होली/होरी" खेलल जाइत अछि ।

तहिना चैतक अन्तिम दिन "सतुआनि पाबनि (उच्चारण - सतुआइन पाबैन)" होइत अछि । बैशाखक पहिल दिन "जुड़ि शीतल (उच्चारण - जुइड़ शीतल या जूड़ शीतल) / बसिया पाबनि (उच्चारण - बसिया पाबैन) / धुरिखेल / धुरखेल / धुलिखेल मनाओल जाइत अछि ।

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फागुनक अन्तिम दिन = "सम्मत" जड़ाओल (होलिका दहन) जाइत अछि ।

चैतक पहिल दिन = "फागु / फगुआ / होली / होरी" खेलल जाइत अछि ।

चैतक अन्तिम दिन = "सतुआनि (उच्चारण - सतुआइन) पाबनि" होइत अछि ।

बैशाखक पहिल दिन = "जुड़ि शीतल (उच्चारण - जुइड़ शीतल या जूड़ शीतल) / बसिया पाबनि (उच्चारण - बसिया पाबैन) / धुरिखेल / धुरखेल / धुलिखेल" होइत अछि ।

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मिथिलामे मास (चान्द्रमास) निर्धारण = विक्रम संवत अनुसारेँ, नञि कि शक संवत अनुसारेँ = चन्द्रमाक गतिक अनुसारेँ

संक्रांति (उच्चारण - सँकरांइत) आदिक निर्धारण = सुर्यक गतिक अनुसारेँ

मसादि = मासादि = मास + आदि = मासक प्रारम्भ = मासक पहिल दिन

मसान्त = मासान्त = मास + अन्त = मासक अन्त = मासक अन्तिम दिन

चन्द्र वर्ष आ सौर वर्षमे तालमेल बैसएबाक लेल "मलेमास" आदिक कल्पना ।

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विक्रम संवत अनुसारेँ, सालक पहिल मास = चैत

विक्रम संवत अनुसारेँ, सालक अंतिम मास = फागुन

विक्रम संवत अनुसारेँ, सालक पहिल पाबनि = फगुआ / होली /होरी

विक्रम संवत अनुसारेँ, सालक अंतिम पाबनि = सम्मत/ होलिका दहन

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मिथिलाब्द / लक्ष्मण संवत अनुसारेँ, सालक पहिल मास = बैशाख

मिथिलाब्द / लक्ष्मण संवत अनुसारेँ, सालक अंतिम मास = चैत

मिथिलाब्द / लक्ष्मण संवत अनुसारेँ, सालक पहिल पाबनि = जुड़ि / (जुइड़ / जूड़) शीतल / बसिया पाबनि / धुरिखेल / धुरखेल / धुलिखेल

मिथिलाब्द / लक्ष्मण संवत अनुसारेँ, सालक अंतिम पाबनि = सतुआनि / सतुआइन

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Sunday, 1 April 2018

सांध्य गोष्ठी - 31 मार्च 2018

सांध्य गोष्ठी - 31 मार्च 2018


आइ 31 मार्च 2018 (शनिदिन) कऽ श्रीमति प्रेमलता मिश्र ‘प्रेम’जीक हनुमाननगर (पटना) स्थित आवास पर ‘सांध्य गोष्ठी’ केर सफल आयोजन सम्पन्न भेल । ई बहुभाषिक कवि गोष्ठी थिक जाहिमे मैथिलीक अतिरिक्त आनहु भाषाक कवि आ लेखक लोकनि भाग लेेलन्हि। ई पछिला नओ - दस बरखसँ हरेक महीनाक अन्तिम “शनिदिन" कऽ आयोजित कएल जाइत अछि । एहि सुअवसर पर निम्न लोकनि उपस्थित छलाह - 

(१). श्रीमति प्रेमलता मिश्र "प्रेम" (आयोजिका) (मैथिली)
(2). श्री (प्रो.) इन्द्रकान्त झा (आजुक गोष्ठीक अध्यक्ष) (मैथिली, हिन्दी)
(३). श्री मृत्युंजय मिश्र "करुणेश" (हिन्दी)
(४). श्री  विजयनाथ झा (मैथिली, हिन्दी)
(५). श्री जगदीश चन्द्र ठाकुर "अनिल" (मैथिली, हिन्दी)
(६). श्री मेहता नागेन्द्र सिंह (हिन्दी)
(७). श्री मनोज मनुज (मैथिली, हिन्दी)
(८). श्री आशुतोष मिश्र (मैथिली, हिन्दी)
(९). श्री कमलेन्द्र झा "कमल" (मैथिली, हिन्दी)
(१०). श्री  उमाशंकर सिंह (हिन्दी)
(११). श्री रामनारायण सिंह (मैथिली, हिन्दी) 
(१२). श्री गणेश झा (मैथिली)
(१३). श्री राजकुमार "प्रेमी" (भोजपुरी, हिन्दी)
(१४). डॉ. शशिधर कुमर "विदेह" (हम स्वयं) (मैथिली)


































आजुक एहि साहित्यिक गोष्ठीमे मिथिलाक सपूत, हिन्दी धारावाहिक ओ फिल्मक प्रसिद्ध अभिनेता स्व. नरेन्द्र झा (मूल गाम  - कोइलख, मधुबनी, बिहार), हिन्दीक प्रख्यात लेखक स्व. केदारनाथ सिंह (मूल गाम  - चकिया, बलिया, उत्तर प्रदेश) आओर तामिल, तेलुगू, कन्नर, मलयालम ओ हिन्दीक प्रख्यात फिल्म अभिनेत्री स्व. श्रीदेवीकेँ (मूल गाम  - शिवकाशी, मद्रास/चेन्नई, तामिलनाडु) २ मिनटक मौन राखि श्रद्धाञ्जलि देल गेलन्हि ।


स्व. नरेन्द्र झा 

स्व. केदारनाथ सिंह

स्व. श्री देवी कपूर