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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Saturday, 30 June 2012

पद्य - ८० - सिनुरदानक गीत


सिनुरदानक गीत


कतेक विघ्न केर बाद  आयल अछि,
ई  पुणीत  शुभदिवस   सुअवसरि ।



सखी हे ! चलू आजु मिथिलाधाम ।
होयतन्हि सिय केर सिन्दुरदान ।।


मड़बा  अछि   चारू  दिशि   साजल,
केरा  गाछ  सञो   द्वारि  बनाओल ।
भाँति - भाँति केर चित्र लिखल अछि,*
साजल  बहुविधि  फूल आ  पल्लव ।
गाबय  सखि  सभ   मंगल – गान ।
होयतन्हि सिय केर सिन्दुरदान ।।


सकल   महीप    पराभव   जखने,
शिवक  महाधनु   तोड़ल   रघुवर ।
कतेक विघ्न केर बाद  आयल अछि,
ई  पुणीत  शुभदिवस   सुअवसरि ।
लागल   मिथिला   शोभा  महान ।
होयतन्हि सिय केर सिन्दुरदान ।।


माथ  उघाड़ि   सिया  छथि  बैसलि,
दर्शन   दिव्य,   देवगण   उमरल ।
वरण कयल मन,  वर सम्मुख छथि,
धनि   शिव-गौड़  मनोरथ   पूरल ।**
देथिन्ह   सिऊँथेँ   सिनूर  श्रीराम ।
होयतन्हि सिय केर सिन्दुरदान ।।





* प्राचीन मैथिली मे “चित्र लिखब” शब्द थिक ”चित्र बनायब” या “चित्र पाड़ब” शब्द आधुनिक मैथिलीक देन अछि ।
** पुष्पवाटिका मे देल गेल माए पार्वतीक आशिर्वाद



उच्चारण संकेत :-

                अंग्रेजी आदिक पोथी सभ मे “आन भाषा – भाषी”क लेल वा “नवसिखिया” सभक लेल कोष्ठ मे “उच्चारण संकेत” (Pronunciations / Phœnetic symbols) देल रहैत छै । मैथिली मे ई परिपाटी नहि, तथापि हमरा लगैत अछि जे देबाक चाही, तेँ एहि बेर सञो शुरू कए रहल छी ।

                मैथिली मे बहुधा “साहित्यिक शब्द लेखन” ओ “शब्दोच्चारण”क बीच थोड़ेक अन्तर देखल जाइछ, जकरा “आन भाषा – भाषी मैथिली शिक्षणार्थी” लोकनि वा “नवसिखिया” लोकनि ठीक सँ नञि बूझि पबैत छथि आ “हिन्दी व्याकरण” केर आधार पर उच्चारण करैत छथि ।

                बहुत बेर “मैथिल” लोकनि “सर्व – साधारण गप्प – शप” मे तँ सही उच्चारण करैत छथि परञ्च जञो “लिखित मैथिली” केँ पढ़ि कऽ उच्चारण करबाक हो तँ ओ “हिन्दी” व्याकरणक आधार पर उच्चारण करैत पाओल जाइत छथि ।

                एहि सभ कारण सँ कए बेर लिखल कविता वा गीत वा गजल सभक उच्चारण, लय, ताल, मात्रा आदि बदलि जाइत अछि । ओना तँ एहि बदलाव सभ केँ रोकब पुर्णतः सम्भव नञि आ पाठक ओ गायक लोकनिक व्यक्तिगत स्वतंत्रता सेहो । पर कएक बेर ई बदलाव एहि स्वरूपक होइछ जे अभिप्रेत लय, ताल पुर्णतया बदलि जाइत अछि । नचारी, डिस्को भऽ जाइत अछि आ सुगम संगीत पॉप या रैप ।

                तेँ उपरोक्त कारण सभक द्वारेँ, हम अप्पन रचना मे प्रयुक्त किछु शब्द सभक उच्चारण संकेत एहि बेर सँ देअब शुरू कएल अछि ।



क्रम संख्या


लिखित शब्द


अभिप्रेत उच्चारण

भाँति
भाँइत,भाँति
सखी
सखी
सखि
सखि, सइख, सैख
होयतन्हि
होयतन्हि, हेतन्हि, हेतैन्ह, हेतैन
दिशि
दिशि, दिश
द्वारि
द्वारि, द्वाइर, दुआइर
अवसरि
अवसइर, अवसैर
उघाड़ि
उघाइड़, उघाइर
धनि
धनि, धैन
सिऊँथ
स्यूँथ, सीथ
१०
केर
(सम्बन्ध कारक विभक्ति)
केर (।।, एकमात्रक दू आखर/अक्षर),
के (ऽ, द्विमात्रिक एक आखर/अक्षर )
११
केँ
(कर्म ओ सम्प्रदान कारक विभ॰)
केँ (ऽ, द्विमात्रिक),
के (ऽ, द्विमात्रिक)
१२
के
(प्रश्नवाचक सर्वनाम वा प्रश्नवाचक सार्वनामिक सम्बोधन)
के 
(एक-, द्वि- या त्रिमात्रिक)
१२
अछि
अछि, अइछ, ऐछ, अइ
१३
छन्हि
छन्हि, छैन्ह, छैन
१४
छथि
छथि, छैथ



डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”                                

विदेहपाक्षिक मैथिली इ पत्रिका, वर्ष , मास ५५,  अंक ‍१०९ , ‍०१ जुलाई २०१२ मे “स्तम्भ ३॰२” मे प्रकाशित ।






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