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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Sunday, 1 January 2012

दक्षिणी ध्रुव पर मनुक्खक पएरक सए वर्ष अर्थात् खिस्सा अण्टार्कटिका केर





विज्ञान विषयक लेख सभक लेल नित नऽव पारिभाषिक शब्द सभक आवश्यकता पड़ैछ । एहि प्रकारक पारिभाषिक शब्द सभ कोनहु भाषा मे ओकर मातृक मूल भाषा (Parent / Source language) सँ बनाओल जाइछ, यथा अंग्रेजी मे लैटिन सँ  मैथिली मे संस्कृत सँ 



दक्षिणी ध्रुव पर मनुक्खक पएरक सए वर्ष
अर्थात्
खिस्सा अण्टार्कटिका केर



                         आइ धिया – पुता सभ सोचैत होयताह कि विदेहजी फेर अहू बेर कोनो उपदेश वला कविता वा गीत लऽ कऽ अओताह आ अनेरो हमर सभक दिमाग खएताह । तऽ से नञि, एहि बेर कोनो उपदेश नञि । एहि बेर हम अहाँ सभ केँ एकटा दूर देशक यात्रा पर लऽ चलैत छी – देश नञि महादेश थिक ओ । चारू कात पानि सँ (समुद्र सँ) घेड़ायल अछि – तेँ महाद्वीप थिक ओ । अहूँ सभ सोचैत होयब कि एहि ठिठुरल जार मे के घऽर छोड़ि कऽ घूमय लेल निकलत । पर जतऽ जयबाक विचार अछि ओहि ठाम तत्तेक ने जार पड़ैत अछि कि अपना ओहि ठामक माघ मास आ तीला संक्राँतिक जार सेहो गर्मी सनि बुझि पड़त । अहाँ सभक मोन मे होइत होयत जे कहीं हम कनाडा या स्विटजरलैण्ड केर बात तऽ नञि कऽ रहल छी । नञि – कथमपि नञि -  स्विटजरलैण्ड वा कनाडा तऽ देश थिक आ हम महादेशक बात कऽ रहल छी । ओ महादेश जत्तऽ प्राकृतिक रूप सँ मनुक्ख नञि रहैत अछि । ............... सही सोचि रहल छी अहाँ सभ, ओकर नाम थिक “अण्टार्कटिका” । अप्पन धरती केर दक्षिणी ध्रुव केर चारू कात बसल महादेश अण्टार्कटिका । अण्टार्कटिका ग्रीक शब्दक रोमण संस्करण थिक, जकर अर्थ होइत अछि “आर्कटिक केर विपरीत”  (Anti - Arctic) अर्थात् “उत्तर केर उनटा” , माने कि “दक्षिण” ।


  
      चित्र सं॰ - 1  – धरतीक ग्लोब पर अण्टार्कटिकाक स्थिति
  

                     अहाँ सभ केँ ई तऽ बुझले होयत कि धरती गोल अछि आ एकर दुनु ध्रुव समतोला सन थोड़ेक धँसल आ सपाट अछि । उत्तरी ध्रुव केँ 90° उत्तरी अक्षांश रेखा आ दक्षिणी ध्रुव केँ 90° दक्षिणी अक्षांश रेखा कहल जाइत अछि । रेखा नाम रहितहु ई दुनु रेखा नञि भऽ कऽ एकटा विन्दुक सदृश थिक । एकर दुनुक आस पासक क्षेत्र केँ क्रमशः “आर्कटिक क्षेत्र”“अण्टार्कटिक क्षेत्र” कहल जाइत अछि । संसार मे सात टा महादेश थिक जाहि मे सँ एक थिक  “अण्टार्कटिका” । ओहि ठाम चारू कात केवल बर्फे - बर्फ अछि, सौंसे धरती बर्फक तऽर मे नुकायल रहैत अछि । ओ दुनियाक सभसँ बेशी निर्जन, ठण्ढा, हवा - बिहाड़ि युक्त आ शुष्क क्षेत्र अछि । सामान्य भाषा मे शुष्क माने सुखायल । अहाँ सभक मोन मे प्रश्न उठल होयत कि एक तरफ तऽ हम कहि रहल छी जे  चारू कात केवल बर्फे - बर्फ अछि आ दोसर तरफ कहैत छी दुनिञाक सभ सँ सुखायल क्षेत्र – से कोना ? ओहि ठामक न्यूनतम् तापमान 89.2°C (-128.6°F) नापल गेल अछि (रूसी अण्टार्कटिक  केन्द्र “वोस्तोक” द्वारा) । तेँ पानि जमि कऽ ठोस आ कठोर (पाथरहु सँ बेशी कठोर) बर्फ भऽ जाइत अछि – हवा सँ पानिक अंश वा आर्द्रता (moisture / humidity) पुर्ण रूपेँ निपत्ता भऽ जाइत अछि, परिणामस्वरूप हवा अत्यन्त शुष्क भऽ जाइत अछि । संगहि ओहि ठाम सतह पर कोनो ऊँच पहाड़, गाछ - वृक्ष वा आन अवरोध नञि होयबाक कारणेँ ई हवा बिना रोक – टोक केर बहैत रहैत अछि आ बिहाड़िक रूप लऽ लैत अछि । एहि ठाम हवा केर अधिकतम् गति 320 कि॰मि॰ प्रति घण्टा नापल गेल अछि । दक्षिणी ध्रुव केर नज़दीक बर्फक अधिकतम् मोटाई 4.776 कि॰मि॰ पाओल गेल अछि – जाहि सँ ओहि ठामक ठण्ढीक अन्दाज आसानी सँ लगाओल जा सकैत अछि । विश्वक स्वच्छ पानि (fresh water)  केर लगभग 70% अण्टार्कटिकाक हिम – आवरणक रूप मे जमल अछि जखन कि विश्वक सम्पुर्ण बर्फक 90%  भाग एकसरि अण्टार्कटिका मे अछि ।

        अण्टार्कटिका केर क्षेत्रफल ‍लगभग
1 करोड़ 40 लाख वर्ग कि॰मि॰ (14.00 million km2) थिक आ ओ एशिया, अफ्रिका, उ॰ अमेरिका आ द॰ अमेरिकाक बाद विश्वक पाँचम सबसँ पैघ महादेश अछि । ई चारू कात सँ दक्षिणी हिम महासागर (अण्टार्कटिक महासागर) सँ घेड़ायल अछि । एहि महासागरक ऊपरुका भाग ठण्ढी मे जमि जाइत अछि, जाहि सँ एहि समय मे महाद्वीपक आकार प्रायः दूना बुझि पड़ैछ । एहि ठाम लगभग 6  महीना केर दिन आ 6  महीना केर राति होइत अछि तेँ अपना घड़ीक अनुसार 6 महीना धरि रातियो मे आकाश मे सूर्य देखाइ पड़ैत अछि – थिक ने आश्चर्यक गप्प ! पर गर्मी केर दिन मे सेहो अधिकतम् तापमान  मात्र - 26°C  (- 15°F) नापल गेल अछि । अपना सभ दिशि माघ मासक शीतलहरी मे सेहो औसत तापमान 4°C सँ  10°C  केर बीचे मे रहैत अछि ।  आब अहीं कहू  - छै ने बहुत ठण्ढा जगह ? पड़ाए गेल ने अहाँ सभक जार ?


चित्र सं॰ - 2ठीक दक्षिणी ध्रुव केर ऊपर सँ देखला पर अण्टार्कटिका केर स्वरूपक रेखाचित्र

        अण्टार्कटिका केर धरती पर मनुक्खक पहुँचब एक समय मे ओहिना छल जेना कि बाद मे चान पर पहुँचब – ओहिना कठिन आ ओतबहि महत्त्वपुर्ण ।  लोक सभ अप्पन – अप्पन प्राणक बाजी लगा कऽ ओतए पहुँचबाक प्रयास मे लागल छलाह । किछु लोक अप्पन – अप्पन उद्देश्य वा लक्ष्य प्राप्त करबा मे सफल भेलाह आ आपिस सेहो आबि सकलाह, जखन कि किछु लोक अप्पन प्राण गमाए बैसलाह ।  ओहि समय मे पाल वला पनिया जहाज अण्टार्कटिका तक पहुँचबाक एक मात्र साधन छल । रस्ता मे “समुद्री बिहाड़ि” (Cyclone) मे घेड़एबाक वा “प्लवित / दहाइत हिमखण्ड” (Iceberg) तथा “प्रवाहित समुद्री हिमखण्ड” (Pancake ice, Polynya etc.) सँ टकड़एबाक वा हिमनद” (Glacier) तथा “हिमीभूत समूद्री सतह” (Pack ice, Fast ice etc.) मे फँसि जएबाक सम्भावना रहैत अछि । प्लवित / दहाइत हिमखण्ड कतेक विनाशक भऽ सकैत अछि तकर सभ सँ नीक उदाहरण “टाइटेनिक” नामक पनिया जहाजक विश्वप्रशिद्ध दुर्घटना सँ लगाओल जा सकैत अछि । ई जहाज साउथेम्पटन (ब्रिटेन) सँ न्युयॉर्क (अमेरिका) जएबा काल, 10 अप्रील 1912 कऽ एकटा एहने “प्लवित / दहाइत हिमखण्ड” (Iceberg) सँ टकड़एबाक कारणेँ दुर्घटनाग्रस्त भेल छल । जएबा व अएबा दुनु कालक लेल खएबा – पिउबाक चीज – बस्तु पहिने सँ संग मे ओरिआ कए राखए पड़ैत छैक ।  ज्यों – ज्यों वातावरणक तापमान कम होइत जाइत छैक आ हवाक शुष्कता एवम् गति बढ़ैत छैक, त्यों – त्यों शरीर सुन्न होमए लगैत छैक, शरीरक कोशिका (Cells) सभ मरए लागैत छैक जकरा चिकित्सकिय भाषा मे “हिम – दाह  / हिम – दग्ध” (Frost bite) कहल जाइत अछि । एहि “हिम - दाह” सँ किछुए काल मे मनुक्खक प्राण तक जा सकैत अछि । तेँ एहि जानमारुक ठण्ढी सँ बचबाक पूरा ओरिआओन संग मे लऽ कऽ चलए पड़ैत छै ।

          अण्टार्कटिका केर बीचो – बीच मध्य अण्टार्कटिक पर्वतश्रेणी
(Trans Antarctic Maountains) थिक जे बर्फ सँ आच्छादित रहैत अछि । ई पर्वतश्रेणी अण्टार्कटिका केँ दू भाग मे बाँटैत अछि – पैघ “मुख्य भाग” (Main land) आ दोसर छोट “प्रायद्विपीय भाग” (Antarctic peninsula) । एकर अतिरिक्त ओहि ठाम किछु सुप्त ज्वालामुखी पहाड़ सेहो थिक जे कखनो कखनो सक्रिय भऽ उठैत अछि । ओहि ठाम लगभग 70  टा स्वच्छ / मीठ पानिक झील (Fresh water lakes) सेहो अछि । ओहि ठाम मनुक्ख तऽ नञि अछि, पर प्राणीविहीन जगह नञि थिक ओ । चिड़ै मे पेंग्वीन (Penguin) (जे उड़ि नञि सकैत अछि पर पानि मे नीक जेकाँ डुबकी लगा कऽ हेलि सकैत अछि आ बर्फ पर अपन दू पएर सँ मनुक्ख जेकाँ चलि सकैत अछि), स्क्युआ (Skua)एल्बेट्रॉस (Albatross) (एकर दुनु पंखक पसार संसार मे आन सभ चिड़ै सँ बेशी होइत अछि) आदि ओहि ठामक मूल निवासी थिक । समुद्र मे सील (Seal), वालरस (Walrus) , क्रील (Krill), मिंक ह्वेल (Mink Whale) आदि पाओल जाइत अछि ।


             चित्र सं॰ - 3 -  अण्टार्कटिकाक जैव धरोहरि

         कैप्टन जेम्स कुक
(Captain James Cook)  पहिल मनुक्ख छलाह जे “अण्टार्कटिक वृत्त” केँ 17 जनवरी 1773 ई॰ कऽ पार कयलन्हि – एकर बाद ओ साले भरि मे दू बेर आओरो प्रयास कयलन्हि पर वातावरणीय विषमताक कारण अण्टार्कटिका धरि नञि पहुँचि सकलाह । 27 जनवरी 1820 ई॰ कऽ रूसी अण्वेषक बेल्लिंगहुसेन (Fabian Gottlieb von Bellingshausen) अण्टार्कटिकाक हिमाच्छादित धरती केँ पहिल बेर दूरहि सँ देखि सकलाह – पर हुनिकहु ओहि ठाम पएर रखबाक सौभाग्य नञि भेटलन्हि । तकरा बाद बहुतो लोक प्रयास कयलन्हि पर ओहि ठाम पएर रखबा मे असफल रहलाह ।

          
उपलब्ध साक्ष्यक अनुसार अण्टार्कटिकाक हिमाच्छादित धरती पर पहिल बेर पएर रखनिहार व्यक्ति छलाह जॉन डेविस (John Davis) – यद्यपि एहि सँ पहिने किछु आओरो लोक सभ एहि तरहक दावा कएने छलाह पर हनिकर सन्दर्भ मे पुष्टि कएनिहार कोनो साक्ष्य उपलब्ध नञि थिक । ओ सील नामक समुद्री प्राणिक शिकारक उद्देश्य सँ 7 फरवरी 1821 ई॰ कऽ पच्छिमी अण्टार्कटिका मे उतरलाह । परञ्च ओ ओहि ठाम किछुए काल ठहरि कऽ आपिस आबि गेलाह, किएक तऽ ओ शिकारी छलाह , वैज्ञानिक नञि । किछु लोक एकरहु विवादिते मानैत छथि ।


                       
चित्र सं॰ - 4 -  दक्षिणी ध्रुव पर पहिल बेर पएर रखनिहार मनुक्ख, नॉर्वे निवासी “रॉएल्ड अमुण्डसेन”



             अण्टार्कटिका आ ओकर बाद दक्षिणी ध्रुव धरि पहुँचबाक प्रतियोगिता निरन्तर चलैत रहल । एहि बेर बाजी मारलन्हि नॉर्वे वासी रॉएल्ड अमुण्डसेन (Roald Amundsen) । ओ ‍14 दिसम्बर 1911 ई॰  कऽ भौगोलिक दक्षिणी ध्रुव (Geographical south pole i.e. 90°S latitude) पर पहुँचबा मे सफल रहलाह । ओ अपन दलक सदस्य सभक संग ओहिठाम नॉर्वे केर झण्डा फहरओलन्हि आ अपन पहुँचबाक साक्ष्य ओतय सुरक्षित राखि आपिस चलि अयलाह । पहुँचबा सँ पहिने ओ अपन यात्रा केर जानकारी दुनिञा सँ नुकाए कऽ रखलन्हि – तेँ हुनक प्रतियोगी सभ केँ एहि बातक मिसियो खबड़ि नञि रहन्हि । अमुण्डसेन केर जन्म 16 जुलाई 1872 ई॰ मे नॉर्वे (यूरोप महादेशक एक टा देश) केर शहर ओस्लो (Oslo)  केर नजदीक क्रिस्चिनिया (Christinia) मे भेल छलन्हि । एहि अभियान मे हुनक जहाजक नाँव छल फ्रॅम (Fram) । हुनक नजदीकी प्रतियोगी इंग्लैण्ड केर कैप्टन राबर्ट फॉल्कन सकॉट (Captain Robert Falcon Scott) अमुण्डसेनक 33 दिनक बाद 17 जनवरी 1912 ई॰ कऽ भौगोलिक दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचि सकलाह आ पहुँचलाक बाद पहिने सँ नॉर्वे केर झण्डा देखि हुनिका बहुत दुख आ तामस सेहो भेलन्हि । आपिस लौटैत काल दुर्घटना मे स्कॉट अप्पन पूरा दल केर संग मारल गेलाह । ‍14 दिसम्बर 2011 ई॰ कऽ अमुण्डसेनक दक्षिणी ध्रुव पर विजयक 100 वर्ष पूरा भेल ।  2011 ई॰ केँ नार्वे “अमुण्डसेन वर्ष” आ यूनेस्को (UNESCO) “दक्षिण ध्रुव पर पहिल मनुक्खक शताब्दी वर्ष” केर रूप मे मनओलक अछि ।



चित्र सं॰ - 5 -  अण्टार्कटिका केर भूगोल आ ओहिठाम भारतीय अनुसंधान केन्द्र दर्शक मानचित्र


        डॉ॰ सय्यद जहूर कासिम (Dr Sayyed Zahoor Qasim) केर नेतृत्व मे 9 जनवरी 1982 ई॰ कऽ 21 सदस्यीय पहिल भारतीय अण्टार्कटिक अभियान दल अण्टार्कटिका केर हिमाच्छादित धरती पर पएर रखलक आ भारतक लेल इतिहास लिखलक । ई दल 1981 कऽ गोआ सँ अपन गण्तव्यक लेल चलल छल । डॉ॰ हर्ष गुप्ता (Dr. Harsha Gupta) केर नेतृत्व मे तेसर भारतीय अण्टार्कटिक अभियान दल द्वारा 1983 – 84 ई॰ मे एकटा स्थायी संशोधन केन्द्रक स्थापना कयल गेल – जकर नाँव राखल गेल “दक्षिण गंगोत्री” । एहि मे एकटा भू - चुम्बकीय प्रयोगशाला (Geomagnetic laboratory) बनाओल गेल । ई एकटा “हिम छज्जी” (Ice shelf) पर स्थापित छल, जे बाद मे बर्फ मे धँसि गेल आ नऽव अनुसन्धान केन्द्र स्थापित करबाक आवस्यकता पड़ल ।

         भारत अण्टार्कटिका मे अपन दोसर स्थायी संशोधन केन्द्रक स्थापना 1989 ई॰ मे कयलक आ 1990 ई॰ सँ “दक्षिण गंगोत्री” केँ पुर्णतया बन्न कऽ देल गेल । नऽव अनुसन्धान केन्द्रक नाम राखल गेल “मैत्री” जे कि बर्फ रहित स्थान पर अवस्थित अछि । अण्टार्कटिकाक 98 प्रतिशत भाग हिमाच्छादित अछि जखन कि मात्र 2 प्रतिशत भाग बर्फ रहित अछि । मैत्रीक स्थान द॰ गंगोत्री सँ लगभग 90 कि॰ मि॰ दूर अछि । भारतक तेसर स्थायी संशोधन केन्द्र निर्माणाधीन थिक जकर नाम होयत “भारती” । भारती केर स्थापना मैत्री सँ लगभग 3000 कि॰ मि॰ दूर अण्टार्कटिका केर आन भाग मे भऽ रहल अछि जाहि सँ एहि विस्तृत महादेशक विस्तृत अध्ययन कयल जा सकय । ई केन्द्र मार्च – अप्रील  2012 ई॰ धरि प्रारम्भ भऽ जायत । 25 मई 1998 ई॰ कऽ राष्ट्रिय अण्टार्कटिक एवं समुद्री अनुसन्धान केन्द्र (National Centre for Antarctic and Ocean Research; NCAOR) केर स्थापना गोआ मे भेल । 14 अक्टूबर 2010 धरि भारत 30 गोट वैज्ञानिक अनुसन्धान दल अण्टार्कटिका पठाए चुकल अछि ।



चित्र सं॰ - 6अण्टार्कटिका मे भारतक पहिल (दक्षिण गंगोत्री) आ दोसर (मैत्री) अनुसंधान केन्द्र आ तेसर (भारती) अनुसन्धान केन्द्रक प्रस्तावित प्रारूप (मॉडेल)

           अण्टार्कटिका
 दुनिञाक सभसँ पैघ प्राकृतिक प्रयोगशाला (Largest Natural Laboratory) अछि । ओहि ठाम भू – चुम्बकत्व, भूगर्भ विज्ञान, पृथ्वी आ सौरमण्डलक उत्पत्ति व विकाश, समुद्री जीव – जन्तु, वायुमण्डल (विशेषतः ओजोन स्तर) पर प्रदूषणक प्रभाव, चिकित्सा, मनोविज्ञान आदिक अध्ययन आ ओहि सँ सम्बद्ध अनुसन्धान काज आदि कयल जाइत अछि ।

             तऽ केहेन लागल नऽव वर्षक अवसरि पर नऽव ठामक यात्रा ? फेर कहियो जखन समय भेटत तऽ आन ठाम घुमबा – फिरबा लेल चलब । आइ बस एतबहि । आब अप्पन – अप्पन घऽर आपिस चलल जाए ।






विदेहपाक्षिक मैथिली इ पत्रिका, वर्ष , मास ४९, अंक ९७, ‍दिनांक - १ जनवरी २०१२, “बालानां कृतेमे प्रकाशित ।



प्रकाशनक हेतु श्री गजेन्द्र ठाकुरजी, श्री उमेश मण्डलजी आ समस्त "विदेह परिवार" केँ बहुत बहुत धन्यवाद । संगहि सभ पाठक लोकनि केँ नऽव वर्षक शुभकामना ।


3 comments:

  1. Maza Aib gel Antarctica ke Yatra Kari ke...
    I Was not Knowing that Antarctica has Ice-less Land too....

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  2. धन्यवाद विकास जी ।

    अपने टिप्पणी देखि कऽ बहुत खुशी भेल कारण कि टिप्पणी बता रहल अछि जे अहाँ पूरा लेख पढ़लहुँ ।

    जय मिथिला, जय मैथिली ।

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