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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Tuesday, 6 March 2012

पद्य - ४८ - हे ऐ भौजी, रूसलि किए छी ?


हे ऐ भौजी, रूसलि किए छी ?
(गीत)



होली मे होइतहि  अछि एहिना, रंग अबीर मे, डूबल ई दुनिञा ।
मानव  केर  तऽ बात कहू की, नाचय धरती बनि नवकनिञा ।।




हे अए (ऐ) भौजी, रूसलि किए छी ?
गाल फुला,  चुप बैसलि  किए छी ?
घऽर मे  बैसलि, किए  आँखि  लाल  करै  छी ?
दू बुन्न पड़िए जँ गेल, तऽ किए बबाल करै छी ?


होली मे होइतहि  अछि एहिना,
रंग अबीर मे, डूबल ई दुनिञा ।
मानव  केर  तऽ बात कहू की,
नाचय धरती बनि नवकनिञा ।
किए  कोप - भवन मे,  अहाँ  कपार  धुनै छी ?
दू बुन्न पड़िए जँ गेल, तऽ किए बबाल करै छी ?


खेलथि ब्रज मे गोपी केर संग,
कृष्णजी     रंग     अबीर ।
मिथिला मे फगुआ अछि नामी,
दियऽर  भाउजि   केर  बीच ।
किए   आइ   अहाँ,   हड़ताल   कएने   छी ?
दू बुन्न पड़िए जँ गेल, तऽ किए बबाल करै छी ?


रूसू जुनि, हम करै छी भौजी,
हाथ     जोड़ि     नेहोरा ।
एक बरख केर बादहि आओत,
पाबनि    फेर     दोबारा ।
किए  स्नेहक  हाथ  अपन,  कात  कएने  छी ?
दू बुन्न पड़िए जँ गेल, तऽ किए बबाल करै छी ?



विदेहपाक्षिक मैथिली इ पत्रिका, वर्ष , मास ५१, अंक ‍१०१ , ‍०१ मार्च २०१२ मे “स्तम्भ ३॰७” मे प्रकाशित ।



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