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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Tuesday, 6 March 2012

पद्य - ४६ - आयल होली केर तिहार


आयल होली केर तिहार
(गीत)

नेने  आयल  छी   संगहि,   रंग – अबीर – गुलाल 



आयल होली केर तिहार ।
संग  बसन्त  बहार ।
नेने  आयल  अछि  संगहि,  नव  उमंग - उल्लास ।।



कतहु लोक सभ झूमि – झूमि कऽ,
घोड़ि    रहल    छथि    भांग ।
कतहु  करैतछि   बालबृन्द   सभ,
रंग    घोड़बाक    ओरिआओन ।
बहय मदहोश बसात ।
संगे  सुरभित सुवास ।
नेने  आयल  अछि  संगहि,  नव  जीवनक  उसास ।।



भोरे  –  भोरे    नबकी    भौजी,
कएलन्हि बन्न केबाड़ आ खिड़की ।
मोन  खड़ाबक  बहाना  बना  कऽ,
बड़की  भौजी   खाट  पकड़लीह ।
लेकिन दियऽर बड़ चलाक ।
चलतन्हि  किनकहु ने  कोनो  बात ।
नेने  आयल  ओ  संगहि,  रंग  हरियर  आ  लाल ।।



भौजी   कतबहु  होथि  लजबिज्जी,
होथि पुरनकी,  नवकी – जुअनकी ।
चाहे   कोनहु   बहाना   बनओती,
लेकिन  रंग  सँ  आइ  ने बचती ।
रंगबनि हिनकर दुहु गाल ।
करबनि   ठोर   दुहु  लाल ।
नेने  आयल  छी   संगहि,   रंग – अबीर – गुलाल ।।



दियऽर भाउज केर बीच होइछ ई,
निर्मल      प्रेमक      धार ।
ई पुणीत अवसरि  आयल अछि,
एक    बरख    केर    बाद ।
जुनि  करू  आइ  लाज ।
नहिञे  आन  कोनहु  लाथ ।
करू  स्वागत  बसन्तक,  रंग – अबीर   लए  हाथ ।।



विदेहपाक्षिक मैथिली इ पत्रिका, वर्ष , मास ५१, अंक ‍१०१ , ‍०१ मार्च २०१२ मे “स्तम्भ ३॰७” मे प्रकाशित । 




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