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Saturday, 4 June 2016

पद्य - ‍१८६ - शिकरा या सिकरा (बाल कविता)

शिकरा या सिकरा (बाल कविता)




शिकरा छी एक बाजक रूप ।*‍१
सिकरा लीखथि बहुतो भूप ।।*‍२

पाँखि छोट  ओ  गोलाकार ।
छोट चिड़ै आ आन शिकार ।।

बगरा ओक्कर प्रिय शिकार ।
बेङ्ग आदि छै सेहो आहार ।।*‍३

उज्जर रंगक पेट आ छाती ।
ताहि पर कत्थी रंगक धारी ।।*‍४

नर-शिकरा केर लाले आँखि ।
स्त्री-शिकराक  पिउरा आँखि ।।*‍५





संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

*‍१ - “शिकरा” एक प्रकारक बाज अछि ।

*‍२ - “शिकरा” शब्दक निस्पत्ति “शिकार” शब्दसँ भेल अछि । मैथिलीमे किछु लोक “शिकरा”केँ “सिकरा” लिखैत छथि पर “शिकार”केँ “सिकार” एखन धरि नञि लिखल जाइत अछि ।

*‍३ - छोट चिड़ै − विशेष कऽ बगरा (SPARROW) − शिकराक सभसँ प्रिय शिकार थिक । ओना आनहु छोट चिड़ैसभ, छोट सरिसृप (REPTILES, जेना कि - गिरगिट आदि) आ छोट उभयचर (AMPHIBIANS, जेना कि - बेङ्ग, भेंक आदि) वर्गक प्राणी आदि शिकराक शिकार बनैत अछि ।

*‍४ - दुहु लिङ्गक शिकराक वक्षोदर भाग (VENTRAL / ANTERIOR PART) उज्जर रंगक होइछ आ ओहि पर भूरा-कत्थी रंगक अड़ीय पट्टी (TRANSVERSE BANDS) रहैछ ।

*‍५ - नर शिकरा आँखिक रंग नारंगी वा लाल होइत अछि जखनि कि स्त्री-शिकराक आँखिक रंग पिउरा ।



मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका “विदेह” केर ‍203म अंक (‍01 जून 2016) (वर्ष 9, मास 102, अंक ‍203) केर “बालानां कृते” स्तम्भमे प्रकाशित ।




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