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Wednesday, 26 December 2012

रजोनिवृत्ति : जानकारी आ सुझाव



रजोनिवृत्ति : जानकारी आ सुझाव



परिचय – पात :-


          कोनहु स्त्रीक प्रजननयोग्य वयसक बाद मासिकधर्म / महीना / मासिक रक्तस्राव / मासिक रजोस्राव  केर पुर्ण रूपेण बन्न भऽ जायब “रजोनिवृत्ति” (Menopause, मीनोपॉज) कहबैछ । ई कोनहु बेमारी वा रोग नञि अपितु एक गोट सामान्य शारीरक्रिया सम्बन्धी अवस्था (Physiological phenomenon)  थिक जे कि हरेक स्त्रिगणक जिनगी मे कहियो ने कहियो अबितहि अछि । तेँ एकरा “सामान्य / स्वभाविक / प्राकृतिक / नैसर्गिक रजोनिवृत्ति” (Natural / Physiological Menopause; नैचुरल / फिजियोलॉजिकल मीनोपॉज) सेहो कहल जाइत अछि । अहाँ कहब जे जखन ई कोनहु बेमारी नञि थिक तँ फेर एहि ठाम एकर चर्च किएक ? बातो उचिते । वास्तव मे ई शरीरक सामान्य वार्धक्य प्रक्रिया (Geriatric Process) रहितहुँ अपना संग किछु एहेन शारीरक्रियाजन्य परिवर्त्तन (Physiological Changes) आनैछ जे ओहि महिलाविशेष लेल क्लेशदायक भऽ सकैछ । सही समय पर उचित ध्यान नञि देला सँ ई परिवर्त्तनसभ उपद्रव वा उपद्रवजनित व्याधि सभ केँ सेहो उत्पन्न कऽ सकैछ । तेँ एहि विषय मे पर्याप्त जानकारी होयब आ एहि अवस्था केँ पहिचानि कए यथोचित सावधानी राखब ओ चिकित्सकीय परामर्श लेब परमावश्यक ।


                            एकर अतिरिक्त कहुखन – कहुखन समयपूर्व रजोनिवृत्ति (Premature menopause), शल्यकर्मजन्य  रजोनिवृत्ति (Surgical menopause), क्ष-किरनजन्य रजोनिवृत्ति (Menopause due to Radiation therapy) सेहो देखबा मे अबैछ । ई सभ प्रकार “असामान्य / अस्वभाविक / अप्राकृतिक / अनैसर्गिक रजोनिवृत्ति” (Abnormal Menopause; एबनार्मल मीनोपॉज) कहल जाइत अछि । एहि सभहक कारण भलहि अलग – अलग हो पर लक्षण ओ चिकित्सा समानहि अछि ।



रजोनिवृत्तिक वयस् :-


                               भारतीय स्त्रीगण लोकनि मे रजोनिवृत्ति प्रायः 45 सँ 55 वर्षक (औसत 50 वर्ष) अवस्था मे पाओल जाइछ । रजोनिवृत्तिक वयस् आनुवंशिक रूपेण पुर्वनियोजित (Genetically predetermined) रहैछ अर्थात् गर्भनिर्माणक अतिप्रारम्भिकहि अवस्था मे रजोनिवृत्तिक समय - सीमा निर्धारित भऽ जाइत अछि । परन्तु धुम्रपान (बीड़ी, सिगरेट आदि) सेवन अथवा पैघ समय धरि गम्भीर कुपोषणक (Prolonged Severe Malnutrition) कारण ई समय - सीमा घटि सकैत अछि ।



रजोनिवृत्तिक संक्षिप्त शारीरक्रिया :-


                             रजोधर्म नियमन (Regulation of Menses) व तत्पश्चात रजोनिवृत्तिक शारीरक्रिया अत्यन्त जटिल थिक जकर विस्तृत वर्णन एहि ठाम देब अनुपयुक्त । संक्षेप मे कही तँ एहि शारीरक्रिया मे पाँच गोट “अन्तःस्राव” (हार्मोन, Hormones) केर प्रमुख भूमिका अछि । गोनैडोट्रॉफिन रिलीजिंग हार्मोन (Gonadotrophin Releasing Hormone / GnRH) मस्तिष्कक हायपोथैलेमस (Hypothalamus) नामक ग्रण्थि सँ स्रवित होइछ जखन कि फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन (Folicle Stimulating Hormone / FSH)ल्यूटीनाइजिंग हार्मोन (Luteinising Hormone / LH) मस्तिष्कहि केर पियूष / पिट्युटरी ग्रण्थि (Pituitary Gland) सँ । एस्ट्रोजेन्स (Oestrogens / Estrogens)प्रोजेस्ट्रोन्स (Progesterones) नाँवक अन्तःस्राव अण्डाशय / डिम्ब ग्रण्थि (ओवरी, Ovary) केर विभिन्न अवयव वा फॉलिकिलक अवस्थाविशेष सँ स्रवित होइछ ।






                 उमेर बढ़ला पर कालान्तर मे क्रमशः अण्डाशय / डिम्ब ग्रण्थिक क्रिया – कलाप मे कमी अबैछ, एस्ट्रोजेन्स आ प्रोजेस्ट्रोन्स नाँवक अन्तःस्राव सभ केर मात्रा मे क्रमशः कमी होइछ । एस्ट्रोजेन्स केर मात्रा मे क्रमशः कमी रजोनिवृत्तिक पुर्वावस्था (Pre-menopause) केर रूप मे देखबा मे अबैछ जखन कि एस्ट्रोजेन्स केर मात्रा मे निर्णायक कमी वा पुर्णतः ह्रास रजोनिवृत्ति (Menopause / Physiological Menopause) केँ उत्पन्न करैछ ।



रजोनिवृत्तिक पुर्वावस्था :-


रजोनिवृत्ति विभिन्न स्त्रीगण लोकनि मे विभिन्न स्वरूप मे प्रकट होइछ, यथा :-

  1. महीनाक अचानकहि बन्न होयब ।
  2. महीना मे होमए बला रक्तस्रावक प्रमाण वा मात्रा मे धीरे – धीरे कमी होयब आ फेर क्रमशः दू – रक्तस्रावक बीचक अवधि (दिन) मे क्रमशः बढ़ोत्तरी होयब वा अनियमितता आयब।
  3. रक्तस्रावक मात्रा यथावत रहब परञ्च महीनाक समय अनियमित होयब ।
  4. रक्तस्रावक मात्रा मे प्रारम्भिक वृद्धि होयब आ संगहि समय मे अनियमितता आयब ।
 

                             तरीका उपरोक्त मे सँ चाहे कोनहु हो पर अन्तिम परिणाम होइत अछि मासिक रक्तस्रावक पुर्ण रूपेण बन्न भऽ जायब । उपरोक्त लक्षण प्रकट होयबक प्रायः 5  सँ 10 वर्षक बात रजोनिवृत्ति होइत अछि , पर कहुखन – कहुखन ई समयान्तराल मात्र किछु महीनाक सेहो भऽ सकैत अछि । ई सम्पुर्ण समयान्तराल रजोनिवृत्तिक पुर्वावस्था (Pre-menopause) कहबैछ ।


                     ओना तँ उपरलिखित कोनहु लक्षण भेटए तँ स्त्रीरोग विशेषज्ञक परामर्श अवश्य लेबाक चाही परञ्च विशेष रूपेण अन्तिम 2 मे सँ कोनहु लक्षणक उपस्थिति जननांगक कर्करोग / कैन्सर (Genital Malignancy) होयबाक सन्देह सेहो उत्पन्न करैछ; तेँ चिकित्सकीय सलाह परमावश्यक ।



रजोनिवृत्तिक निदान, जाँच व निर्धारण :-


रजोनिवृत्तिक निदान निम्न लक्षण ओ प्रयोगशालीय परीक्षणक आधार पर कयल जाइत अछि :-

  1.  अन्तिम मासिक रक्तस्रावक बाद योनिमार्ग सँ लगातार 6  महीना धरि रक्तस्रावक नञि होयब (किछु विशेषज्ञ लोकनि ई समय – सीमा 1 वर्ष धरिक मानैत छथि) ।
  2.  रजोनिवृत्तिक आन लक्षण (रजोनिवृत्तिक पश्चावस्था मे वर्णित दुष्प्रभाव ओ उपद्रव) सभक प्रकटीकरण ।
  3.  योनिगत कोशिकावीक्षण (Vaginal Cytology) नामक जैववैज्ञानिक विश्लेषण (Microscopic Analysis) मे परिवर्धन गुणांक (Maturation Index) कम सँ कम 10/85/5  धरि होयब । ई एस्ट्रोजन नामक अन्तःस्राव (हार्मोन) केर कमीक परिचायक थिक ।
  4. खूनक प्रयोगशालीय परिक्षण (Serological Investigation) मे सीरम एस्ट्रेडिओल (Serum Oestradiol) केर मात्रा 20 पिकोग्राम प्रति मिलि लीटर सँ कम ( < 20 pg / mL ) होयब । सीरम एस्ट्रेडिओल एस्ट्रोजन्स समूहक सर्वप्रमुख अन्तःस्राव (हार्मोन) थिक ।
  5.  एक – एक सप्ताहक अन्तर पर लेल गेल लगातार तीन टा खूनक नमूना (Serum Samples) मे FSH LH नाँवक अन्तःस्राव (हार्मोन) केर मात्रा 40 mLU/mL सँ हमेशा (तीनू बेर) बेशी ( >40 mLU/mL )  होयब । 


रजोनिवृत्तिक पश्चावस्था :-


                        एक बेर पुर्ण रूप सँ महावारी रूकि गेलाक बादक शेष सम्पुर्ण वयस् रजोनिवृत्तिक पश्चावस्था (Post-menopause) थिक । एहि सम्पुर्ण अवधि मे स्त्री-शरीरकेँ एस्ट्रोजेन्स समूहक अन्तःस्राव (हार्मोन) केर अभाव रहैछ जकरा कारण हुनक स्वास्थ्य पर विभिन्न प्रकारक दुष्प्रभाव पड़ैत अछि । किनकहु मे एहि दुष्प्रभाव वा उपद्रव सभक तीव्रता किछु कम रहैत अछि तँ किनकहु मे अत्यन्त प्रबल । 



रजोनिवृत्तिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव वा उपद्रव :-


रजोनिवृत्तिक समय ओ पश्चात स्त्रिगणक स्वास्थ्य पर कमोबेश निम्नांकित दुष्प्रभावजन्य लक्षण देखबा मे अबैछ :-





  1. उष्ण लहरि (लहैर) मारब (Hot flushes / Hot flashes):-  सम्पुर्ण शरीर मे अचानकहि एक – दू मिनिट केर लेल आगिक लहरि समान असह्य वेदना (दाहवत् वेदना) होयब । रातुक समय मे विशेष कष्टदायी होइछ । रजोनिवृत्तिक प्रारम्भिक एक – दू वर्ष धरि विशेष रूप सँ उपद्रवकारी । किनकहु – किनकहु मे उष्ण लहरि केर बदला मे शीत लहरि (Cold flashes) सेहो देखबा मे अबैछ ।
  2. रात्रि – स्वेद (Night sweats) :- प्रायः उष्ण लहरि केर संग – संग राति मे अत्यधिक घाम/पसेना (Profuse nocturnal sweating) सेहो छुटैछ ।
  3. हृत्कम्प (Palpitation) :- स्वयं केँ अपन हृदयक धड़कन महसूस होयब । संगहि नाड़ी गति (Pulse rate) प्रति मिनट सामान्य सँ 20 धरि बढ़ि जायब ।
  4.  तीव्र मस्तिष्क वेदना वा अधकपारि (Severe Headache / Migrain) :-  पूरा माथा वा माथाक आधा भाग मे तीव्र असह्य वेदना होयब ।
  5.  त्वचा विकार (Skin disorders) :- चमरी रुक्ष भऽ जाइत अछि, मृदुत्त्व आ लचीलापन मे कमी भऽ जाइत अछि, जाहि कारण बहुत बेर चमरी फाटबाक समस्या देखबा मे अबैछ । अधिकांश स्त्रिगण लोकनि मे रजोनिवृत्तिक समय व पश्चात विभिन्न अंग मे खुजली (Itching), सूई वा पिन गड़बा सदृश वेदना (pins and needles sensation), झुनझुनी (Tingling numbness) आदि समस्या देखबा मे अबैछ । कहुखन – कहुखन चमरी पर वा चमरी केर भीतर अनेरो चुट्टी चलबा सदृश बुझना पड़ैत छन्हि ।
  6. अतिवेदना युक्त मैथुन वा मैथुन-असहिष्णुताक (Dyspareunia) :- समस्त देहक चाम केर संग – संग एहि मूत्र ओ प्रजनन तन्त्रक (Urogenital systems) क्षेत्र मे रूक्षता बढ़ि जाइत अछि । एहि कारण अतिवेदना युक्त मैथुन वा मैथुन-असहिष्णुताक (Dyspareunia) स्थिति सेहो भऽ सकैछ ।
  7. मूत्र विकार (Urinary disorders) :- त्वचा केर स्नेहांश कम होयबाक कारणेँ इहि प्रदेश मे बेर – बेर संक्रमण भऽ सकैत अछि । संक्रमणक कारण नोचनी (Itching), खून या पानि सन कोनहु द्रवक स्राव, बेर – बेर मूत्र त्याग करबाक इच्छा (Urinary frequency), मूत्रवेग विधारण क्षमता मे कमी (Urinary urgency / incontinence), सकष्ट मूत्र प्रवृत्ति / मूत्रकृच्छ्रता (Dysuria) आदि लक्षण देखबा मे अबैत’छि ।
  8. स्तन विकार (Mammary/Breast problems) :-  स्तनक सौष्ठव समाप्त भऽ जाइत अछि । अधिकांश स्त्रिगण लोकनि मे रजोनिवृत्तिक समय व पश्चात स्तन प्रदेश मे सूजन / शोथ (Swelling) केर संग – संग वेदना (Tenderness) सेहो देखबा मे अबैछ ।  वेदनाक स्वरूप सामान्य सँ लऽ कऽ असह्य धरि भऽ सकैत अछि ।
  9. मानसिक विकृति (Psychological problems) :-  छोट – छोट बात पर अनेरो – अकारण चिन्ता करब (Anxiety), माथा भारी लागब (Headache), ठीक सँ निन्न नञि आयब / अनिद्रा (Insomnia) , अवसाद सँ ग्रसित होयब (Depression), कोनो काज मे मोन नञि लागब, धेआन कोनहु एक काज पर नञि लागब, मोन भटकब आदि लक्षण देखबा मे अबैछ । कहुखन – कहुखन तुरन्त भेल घटना सभ केँ बिसरि जयबाक (Dementia) लक्षण सेहो भेटैछ ।
  10. अस्थि ओ सन्धि विकृति (Bone & Joint disorders) :-  प्रायः सभ सन्धि (विशेषतः ठेहुन, छाबा, पीठ, केहुनी आदि) मे दर्द (Arthralgia) संगहि – संग सन्धिप्रदेशक मांसु मे सेहो वेदना (Myalgia) रहैछ । हड्डी कमजोर भऽ जाइछ, अस्थिक्षय (Osteopenia) ओ अस्थिसौषिर्य (Osteoporosis) केर स्थिति उत्पन्न भऽ जाइछ (अस्थिसौषिर्य पर पुर्ण जानकारी मिथिलांचल टुडे पत्रिकाक प्रवेशांक मे देखू) ।
  11. शिरोधमनी आ हृद्धमनी विकार (Ceerebrovascular & Cardiovascular disorders) :- रजोनिवृत्तिक बादक समय मे एहि तरहक विकारक सम्भावना बहुत शिघ्रता सँ बढ़ैत अछि ।

रजोनिवृत्तिजन्य दुष्प्रभाव वा उपद्रवक चिकित्सा :-


रजोनिवृत्ति एकटा सामान्य शारीरीक प्रक्रिया थिक तेँ एकरा रोकब सम्भव नञि । पर एकरा कारण होमएबला उपरोक्त लक्षण सभ पर नियण्त्रन कऽ कऽ रजोनिवृत्तिक पश्चातक स्वास्थ्य ओ जिनगी केँ अपेक्षाकृत नीक बनाओल जा सकैत अछि । किछु सहज अनुकरनीय उपाय सभ नीचाँ देल जा रहल अछि :-

  1. रजोनिवृत्तिक लक्षण सभ केँ नीक जेकाँ चिन्हबाक चाही, घबड़एबाक नञि चाही आ जँ यौन स्थान सँ सम्बन्धित लक्षण हो तँ चिकित्सकीय परामर्श लेबा मे संकोच नञि करबाक चाही ।
  2. मूत्र-जननांग प्रदेश केँ हमेशा स्वच्छ रखबाक चाही, कोनहु प्रकारक स्राव या संक्रमण केर सम्भावना होयबा पर अनठएबाक नञि चाही, तुरन्त चिकित्सकीय परामर्श लऽ पुर्ण चिकित्सा लेबाक चाही ।
  3. खान – पिउन मे कैल्सियमयुक्त भोजनक प्रचूरता होयबाक चाही । दूध, दही, तिल, तीसी, पालक, शलजमक साग, सरिसो साग, मेथी साग, पत्ताकोबी, फूलकोबीक पात, अरिकोंच, कुर्थी, राजमा, सोयाबीन, चना दालि, ऊड़ीद दालि, रोहु माछ, झींगा माछ, काँकोड़, डोका आदि मे कैल्सियम नामक तत्त्वक प्रचूरता होइछ । एहि अवस्था मे स्त्रिगण सभ मे सामान्य अवस्था सँ करीब दूना कैल्सियमक आवश्यकता (800 – 100 मि॰ग्रा॰/दिन) पड़ैछ ।
  4. कैल्सियम बिना विटामिन – D केर शरीर द्वारा उपयोग मे नञि आनल जा सकैछ । विटामिन – D भोरुका सुरुजक प्रकाश मे रोज 15 – 30 मिनट बैसला सँ आसानी सँ भेटैछ ।
  5. खान – पिउन मे प्रोटीनयुक्त भोजनक प्रचूरता होयबाक चाही । प्रायः हर तरहक दालि, चिनियाबदाम, सोयाबीन आदि प्रोटीनक मुख्य स्रोत अछि ।
  6. हरियर पत्ताबाला तरकारी मे प्रायः हर तरहक जरूरी विटामिन – B  भेटैछ, तेँ बेशी प्रयोग करबक चाही ।
  7. पुर्ण रूप सँ बेड रेस्ट मे नञि रहबाक चाही, घरक सामान्य काम – काज करबाक चाही जाहि सँ शरीरक सामन्य कसरत भऽ सकए ।


               घऽरक आनो सदस्य लोकनि केँ एहि सम्बन्ध मे जानकारी राखब आ धेआन देब जरूरी । घऽरक आन लोकनिक सहयोग आ सहनशीलता परमावश्यक, यथा :- कोनहु चीज बिसरि गेला पर डँटबाक जगह वस्तुस्थिति केँ बुझबाक प्रयास करथि । हिनक खान – पिउन आदि पर धिया – पुता जेना ध्यान देब जरूरी ।


                  आइ – काल्हि “अंतःस्राव प्रतिस्थापन चिकित्सा / हार्मोन रिप्लेशमेण्ट थिरैपी” (Hormone Replacement Therapy, HRT) विशेष प्रचलित भऽ रहल अछि । औषधि रूप मे मुख्यतः एस्ट्रोजेन नामक अंतःस्राव केँ प्रतिस्थापित कएल जाइत अछि, तेँ एकरा “एस्ट्रोजेन प्रतिस्थापन चिकित्सा / एस्ट्रोजेन रिप्लेशमेण्ट थिरैपी” (Estrogen Replacement Therapy, ERT) सेहो कहल जाइत अछि । ई चिकित्सा बहुत प्रभावी अछि । एहि सँ स्तन कैन्सर आ गर्भाशय (बच्चादानी) कैन्सर केर सम्भावना सेहो बहुत कम भऽ जाइत अछि । पर एकर तेहने किछु अवाञ्छित प्रभाव (Side effects) सेहो अछि, तेँ हमेशा कोनो स्त्रीरोग विशेषज्ञक परामर्शक बादहि आ हुनिकहि देख-रेख मे ई चिकित्सा लेबाक चाही ।






“मिथिलांचल टुडे” वर्ष - ‍१, अंक – ५, नवम्बर – दिसम्बर २०१२ (महिला विशेषांक) मे प्रकाशित ।