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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Tuesday, 15 December 2015

पद्य - ‍१‍३‍० - छठि गीत २ (गीत)



छठि गीत - ‍२






दीन - हीन पापी मुरूख हम, कएलहुँ बड़ अपराध ।
क्षमा करू  तइयो  हे सुरूजदेव दिनकर दिनानाथ !!

ठाढ़ पानिमे  विनय  करै छी ।
निज अपराधक क्षमा मँगै छी ।
अरघ नेने छी ठाढ़,  करू स्वीकार  हे दीनानाथ ।
क्षमा करू गलती हे सुरूजदेव दिनकर दीनानाथ !!

अपना लेल सौभाग्य मँगै छी ।
अपना खोंइछक लाज मँगै छी ।
हम  अज्ञानी,  देव अहाँ छी,  होइयौ ने सनाथ ।
क्षमा करू गलती हे सुरूजदेव दिनकर दीनानाथ !!

सिंउथ सिनूरे लाल मँगै छी ।
कोरा सुन्नर  लाल मँगै छी ।
सिया-धिया अँगना खेलए आ खेलए बाल-गोपाल ।
क्षमा करू गलती हे सुरूजदेव दिनकर दीनानाथ !!


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