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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Tuesday, 8 May 2012

पद्य - ६‍१ - शान्तिक सपूत संग्राम करय


शान्तिक सपूत संग्राम करय
(गीत)




काश्मीर  बनय, आसाम  बनय ।
शान्तिक  सपूत  संग्राम  करय ।*
नञि दोष हुनिक एहि मे कनिञो,
जँ मिथिला - भू पञ्जाब बनय ।।


हम मैथिल छी - मिथिलाबासी ।
सम  अधिकारक छी अभिलाषी ।
जहिना  तामिल  ओ  गुजराती,
तहिना   हमहूँ   मिथिलाभाषी ।
हमरहु  इच्छा,  हमरहु  मिथिला,
कर्णाटक  ओ  बङ्गाल  बनय ।।


हम माङ्गय छी नञि किछु विशेष,
निज  माङ्गय छी अधिकार बेस ।
हमरो प्रगतिक अछि  हक ओहिना,
जहिना   करइछ  आनहु  प्रदेश ।
जञो नञि, तँ दोष हुनिक ने कहब,
यदि क्रान्तिक कतहु मशाल जरय ।।


नञि भीख, अपन अधिकार मङ्गै छी,
कोशी – कमला  धार   मङ्गै  छी ।
जल–थल–नभ मे सञ्चार  मङ्गै  छी,
शिक्षा – रोजी – व्योपार  मङ्गै छी ।
नञि  कहब  फेर,  जञो आइ एखन,
हर  मैथिल, हर – विकराल बनय ।।

हर   प्रदेश,  भारत  केर  हिस्सा,
सभहक   दर्जा   एक   समान ।
तखन  किए  केओ  अमृत लूटय,
ककरो   भेटय  विष – अपमान ।
नञि फेर कहब - हुनिका सँ केओ,
जञो कोसी कमला लाल बहय ।।






* स्वभाव सँ मिथिलाक सपूत / मैथिल / मिथिलाबासी / मिथलाभाषी शान्तिप्रिय ओ सहनशील होइत अछि । ओ ककरहु सँ अनावश्यक युद्ध नञि चाहैत अछि । इतिहास साक्षी अछि कि मिथिलाक कोनहु राजा वा कोनहु व्यक्ति सिर्फ अपन राज्यक सीमाविस्तार वा अपन महत्त्वाकांक्षाक पुर्त्तिक लेल कहियो ककरहु पर अनावशयक युद्ध नञि थोपलक । ओकरा लऽग मे जतबहि भू – भाग वा सम्पदा छलै ततबहि मे सन्तुष्ट रहल । 

परन्तु आइ लोक ओकर शान्तिप्रिय ओ सहनशील स्वभाव केँ गलत स्वरूप मे ग्रहण करैछ । ओकरा आधुनिक राजनैतिक तन्त्र व आन विभिन्न सञ्चार माध्यम सँ बेर बेर उदाहरण देल जाइछ कि “क्या आप तेलंगाना की तरह विरोध प्रदर्शन कर सकते हो ?” ................... ओकर शान्तिपुर्ण माँग सभ केर प्रति धेआन नञि देब आओर संगहि पुर्ण दमनात्मक कार्यवाही करब सर्वथा अनुचित थिक । ओकरा जबरदस्ती अपन शान्तिपुरण रास्ता केँ छोड़बाक लेल उकसाएब थिक ।


स्वभाव सँ मिथिलाक सपूत
/ मैथिल / मिथिलाबासी / मिथलाभाषी एखनहु शान्तिप्रिय ओ सहनशील छथि । तेँ एहि गीतक माध्यमेँ भारत सरकार ओ तथाकथित समाचार व सञ्चार माध्यम सँ निवेदन जे अपन अनुचित ओ दमनात्मक क्रियाकलाप केँ विराम देथु; गलत जानकारी प्रसारित कए वा जानकारी सभ केँ गलत स्वरूप मे प्रचारित – प्रसारित कए मिथिला, मैथिल व मैथिली केँ तोड़बा – फोरबाक प्रक्रिया सँ बाज आबथु ।





डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”                                
एम॰डी॰(आयु॰) – कायचिकित्सा                                   
कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एण्ड रिसर्च सेण्टरनिगडी – प्राधिकरणपूणा (महाराष्ट्र) – ४११०४४



विदेह” पाक्षिक मैथिली इ  पत्रिकावर्ष मास ५२ , अंक ‍१०४ , ‍१५ अप्रिल २०१२ मे “स्तम्भ ३॰७” मे प्रकाशित ।





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