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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Sunday, 19 February 2012

पद्य - ४‍१ - कामिनी ! जुनि तोड़ू अहँ फूल


कामिनी ! जुनि तोड़ू अहँ फूल


कामिनी !
जुनि तोड़ू अहँ फूल ।
फूलहि निर्मित अंग अहँक अछि, गरि जायत कोनो शूल ।।


[ई तैल चित्र स्व॰ एमिल ईजमान सेमेनोवस्की द्वारा बनाओल गेल  "एन ऑरिएण्टल फ्लावर गर्ल" नामक चित्रक अंश थिक । सेमेनोवस्की एक पॉलिश चित्रकार रहथि आ हुनक काल 1857 ई॰ सँ 1911 ई॰ धरि रहन्हि ।]







कामिनी !
        जुनि तोड़ू अहँ फूल ।
फूलहि निर्मित अंग अहँक अछि, गरि जायत कोनो शूल ।।

मुँह अहँक जनु रक्त कमल ।
नील कमलदल नयन युगल ।
ग्रीवा मृणाल, जल अलक बनल अछि, अधर कुसुम अरहूल ।
                      कामिनी ! जुनि तोड़ू अहँ फूल ।।

आँचरे झाँपि गुलाबक थौका ।
श्वासक संग मलय केर झोंका ।
अपनहि रमणि,  रुचिर कुसुमादपि,  तोड़ब किए अहँ फूल ?
                      कामिनी ! जुनि तोड़ू अहँ फूल ।।

पद पंकज अहँ केर कोमलतर ।
उपवन बीच भ्रमर कर सञ्चर ।
अहँ केँ  देखि  भ्रमर  लोभायल,  अयलहुँ,  कयलहुँ  भूल ।
                      कामिनी ! जुनि तोड़ू अहँ फूल ।।




डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”                                
एम॰डी॰(आयु॰) कायचिकित्सा                                   
कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एण्ड रिसर्च सेण्टर, निगडी प्राधिकरण, पूणा (महाराष्ट्र) ४११०४४,

विदेहपाक्षिक मैथिली इ पत्रिका, वर्ष , मास ५० , अंक ‍१०० , ‍१५ फरबरी २०१२ मे “स्तम्भ ३॰७” मे प्रकाशित । 





1 comment:

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