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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Friday, 27 January 2012

पद्य - ३७ - माँ शारदे वन्दना - ‍१


माँ शारदे वन्दना - ‍१
(गीत)





जय  अम्बे,  जय  माँ शारदे,
विनय  हमर  स्वीकार करू ।
सभहक अहाँ सुनै छी हे माता,
हमरो   बेड़ा   पार    करू ।
क्षमा करू  अपराध हमर सभ,
हमरो  अहाँ   उद्धार   करू ।
जय  अम्बे,  जय  माँ शारदे,
विनय  हमर  स्वीकार करू ।।

नञि जानी पूजा केर विधि  माँ,
हम धिया - पुता अज्ञानी छी ।
दिशाहीन  संसार  बीच    हम,
अहींक  चरण - अनुगामी छी ।
हमहूँ अहींक सन्तान छी  माता,
हमरो निज करुणा  दान करू ।
पथ - प्रशस्त, शुभ - दिशाबोध,
सद्ज्ञान  दियऽ, अभिमान हरू।
जय   अम्बे,  जय  माँ शारदे,
विनय   हमर  स्वीकार करू ।।


नञि बालक प्रह्लाद छी हम माँ,
नञि ध्रुव सन हम ज्ञानी छी ।
आयल छी माँ अहींक शरण मे,
कृपा  दृष्टि  केर  कामी  छी ।
अज्ञानक  अन्हार   हरू   माँ,
ज्ञानक  ज्योति  प्रदान  करू ।
नहि हमरहि, सम्पुर्ण जगत भरि,
सभ – जन केर कल्याण करू ।
जय   अम्बे,  जय  माँ शारदे,
विनय   हमर  स्वीकार करू ।।


लेखकः- डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”

“विदेह” मैथिली पाक्षिक इ – पत्रिका, अंक ९९, वर्ष ५, मास ५० मे,  ‍१ फरवरी २०१२ कऽ, स्तम्भ “बालानां कृते” मे प्रकाशनार्थ प्रेषित ।

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