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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Friday, 27 January 2012

पद्य - ३७ - माँ शारदे वन्दना - ‍२


माँ शारदे वन्दना - ‍२
(गीत)





जय  माँ   शारदे,  विद्यादायिनी,
अज्ञानस्य    तिमिर    हरणम् ।
तन शुभ्र प्रकाशित, पंकज राजित,
शोभित  चारु   कमल  नयनम् ।।
जय  माँ   शारदे,  विद्यादायिनी, अज्ञानस्य   तिमिर    हरणम् ।।

भामिनी  चतुरानन,  हंसहि वाहन,
शान्त  स्वभाव,  वाणि  मधुरम् ।
वीणा कर शोभित, सभजन पूजित,
सकल  कला – कौशल  कुशलम् ।।
जय  माँ   शारदे,  विद्यादायिनी, अज्ञानस्य   तिमिर    हरणम् ।।


मम्  जहि  निर्बुद्धि,  देहि  सुबुद्धि,
विद्या  सम   वारिधि   सलिलम् ।
छल लोभ च कामम्, तम अज्ञानम्,
हरिअ  सकल  मम्  दोष अयम् ।।
जय  माँ   शारदे,  विद्यादायिनी, अज्ञानस्य   तिमिर    हरणम् ।।


लेखकः- डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”

“विदेह” मैथिली पाक्षिक इ – पत्रिका, अंक ९९, वर्ष ५, मास ५० मे,  ‍१ फरवरी २०१२ कऽ, स्तम्भ “बालानां कृते” मे प्रकाशनार्थ प्रेषित ।

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