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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Thursday, 15 December 2011

पद्य - ३‍१ - प्रथम् पुज्य मिथिला हमर शत् - शत् प्रणाम


।। प्रथम्  पुज्य मिथिला हमर शत् - शत् प्रणाम ।।
(मिथिला वन्दन गीत)


कवि  कोकिल विद्यापति केर गाम एतए विसफी


स्वर्गहु   सँ   सुन्नर   पावन   जे    धाम  
प्रथम्  पुज्य मिथिला हमर शत् - शत् प्रणाम ।।*

मण्डन - अयाची - उद्याना    केर     नगरी ।
कवि  कोकिल विद्यापति केर गाम एतए विसफी ।
आबि   एतए    भेलाह    शंकर     निरूत्तर ,
कर्मभूमि   जनकक,  ओ  सीता   केर  गाम ।
प्रथम्  पुज्य मिथिला हमर शत् - शत् प्रणाम ।।

गोबर   सँ   नीपल   द्वारि , पाड़ल  अरिपन ।
स्वच्छ - सुगम्य बाट - घाट  लागय  मनोरम ।
गाछ  जतऽ  फूल,  बेलपात  आ  अशोक केर ,
खल – खल    हँसैत,     भरल     खरिहान ।
प्रथम्  पुज्य मिथिला हमर शत् - शत् प्रणाम ।।

नामी  जतऽ   केर   अछि   भोजन  सचार ।
चुड़ा - दऽही - चिनी  आ   आमक    अचार ।
नामी   अछि  विश्व  भरि  पेण्टिङ्ग जतऽ केर,
नामी  जतऽ  केर  अछि  पान  आ   मखान ।
प्रथम्  पुज्य मिथिला हमर शत् - शत् प्रणाम ।।

गीत   विद्यापति  केर   गूँजय  हर  अङ्गना ।
बाजय   राधा   केर   पायल  आ   कङ्गना ।
गूँजय    यत्र – तत्र   गीत    भगवान    केर,
हर – हर   महादेव,   जय   राम – घनश्याम ।
प्रथम्  पुज्य मिथिला  हमर शत् - शत् प्रणाम ।।



* ई हमर बहुत पुराण गीत सभ मे सँ थिक, जे कि ‍१९९० - ‍१९९७ केर बीच किछु लोकनि द्वारा “जे॰ एन॰ कॉलेज मधुबनी”, “आर॰ के॰ कॉलेज मधुबनी” तथा “भगवती स्थान कोइलख मधुबनी” आदिक मञ्च सभ सँ गाओल जा चुकल अछि ।

विदेहपाक्षिक मैथिली इ पत्रिका, वर्ष , मास ४८, अंक ९६, ‍दिनांक - १५ दिसम्बर २०११, स्तम्भ ३॰७ मे प्रकाशित ।


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