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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Wednesday, 22 June 2016

पद्य - ‍१९२ - साही (बाल कविता)

साही (बाल कविता)



साहीक काँट तँऽ सुनने हएबहक ।
सुनने की - देखने सेहो हएबहक ।
साहीक काँटमे “साही” की ??

“साही” मूस - गणक  छी प्राणी ।*
मूससँ  बहुते  पैघ - से  जानी ।
सौंसे  देहे  “काँट”  बुझी ।।

दिन भरि बियरिमे रहैत अछि ।
बाहर  रातिएमे निकसैत अछि ।*
रक्षा-कवच ई “काँट” कही ।।

कारी - उज्जर   काँट  छियै ।*
उपनयनहुमे    काज   छियै ।*
पहिलुक लेखनी इहो बुझी ।।*


संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - मूस आ साही − दुहु एक्कहि कुलक सदस्य अछि । ओहि कुलक नाम अछि रॉडेण्शिया (RODENTIA)

* - ई बिलेशय प्राणी अछि आ माटिक नीचाँमे बिलमे रहैत अछि । संगहि रातिचर (NOCTURNAL) प्राणी सेहो अछि ।

* - साहीक काँट (QUILS / SPINES) परिवर्तित रोइयाँ (MODIFIED HAIR) थिक जकर रूप-रंग ओ आकार साहीक प्रकार तथा सहीक वयस पर निर्भर करैछ ।



* - उपनयनमे शिखा-विभाजनक विधमे (बरुआक टीककेँ ३ भागमे बँटबाक बिधमे) साहीक काँटक काज पड़ैछ ।

*- पहिने अपना दिशि भीत (माटिक देबाल) पर चित्र बनएबा काल चित्रक खाका (OUTLINE / ROUGH DIAGRAMME) बनएबा हेतु सेहो प्रयुक्त होइत छल ।

                  यूरेसिया (यूरोप आ एसिया) तथा अफ्रिका महादेशकेँ पुरना दुनिञा (OLD WORLD) आ उतरबारी तथा दछिनबारी अमेरिका महादेशकेँ नवका दुनिञा (NEW WORLD) कहल जाइत अछि । साहीक जे जाति (SPECIES) जाहि ठामक मूल निवासी अछि ताहि अनुसारेँ ओकरा सभकेँ पुरान दुनिञाक साही (OLD WORLD PORCUPINES - ORDER HYSTRICIDAE) नऽव दुनिञाक साही (NEW WORLD PORCUPINES - ORDER ERETHIZONTIDAE) कहल जाइत अछि । साही रहितहुँ दुनु समूहमे बहुत बेसी अन्तर अछि ।

मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍204म अंक (‍15 जून 2016) (वर्ष 9, मास 102, अंक ‍204) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।


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