Pages

मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Wednesday, 22 June 2016

पद्य - ‍१९० - कबार (बाल कविता)

कबार (बाल कविता)



छी कंकूर - सहोदर,  पर हम
ओकरासँ  किछु  छोट  छी ।
नाङ्गरि पातर छोट-क्षीण मोर,
ओक्कर  तँऽ  चौकोर  छी ।।*

कंकूरहि  सनि  लोल   हमर,
आ  देहक  कारी  रंग  छी ।
माथ  सेहो   एकवर्णी  कारी,
लाल ने  ओक्कर  रंग छी ।।*

सालक किछु  एहनहु महीना,
लोहाक बीझ सनि रंग हमर ।
देहक चमक  बढ़ल - बदलल,
हरियर-कारी छी पंख हमर ।।*

कंकूरक सनि भलहि लोल छी,
अलगहि पर सब ढंग हमर ।
हम  नञि भेटब  दूर चऽड़मे,
पानिक श्रोतक  संग हमर ।।*

संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - करांकुलक अंग्रेजी नाम BLACK NAPED IBIS अछि आ कबारक GLOSSY IBIS, तेँ दुहुमे बहुत नजदीकक सम्बन्ध अछि । तथापि, दुहुमे बहुत किछु भिन्नता सेहो अछि आ तेँ प्राणीशास्त्रक वर्गीकरणमे सेहो दुहु अलग - अलग वंशक चिड़ै अछि । करांकुलसँ कबारक आकार छोट होइत अछि । करांकुलक नाङ्गरि चौकोर होइत अछि जखनि कि कबारक अपेक्षाकृत कम चौकोर ओ छोट ।

* - कबारक आकार-सुकार देखबामे करांकुलहि सनि लागैत अछि । लोलक आकृति सेहो कंकूरहि सनि रहैछ । पर, कबारक माथक ऊपरमे कंकूर जेकाँ लाल रंग नञि रहैत अछि ।

* - सालक किछु महीना एहन होइत अछि जाहिमे कबारक देहक रंग भूरा-कारीसँ बदलि बीझायल लोहाक रंगक (RUSTY COLOUR) आ चमकयुक्त (GLOSSY) भऽ जाइत अछि । दुहु पंखक रंग बदलि कऽ कजरी सनि गाढ़ चमकैत हरियर भऽ जाइत अछि ।

* - करांकुलक विपरीत कबार जलाशयक आस-पासक क्षेत्रमे भेटैत अछि । पानिक श्रोतसँ बेसी दूर ई चिड़ै नञि देखाइ दैछ ।



मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍204म अंक (‍15 जून 2016) (वर्ष 9, मास 102, अंक ‍204) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।


No comments:

Post a Comment