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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Wednesday, 22 June 2016

पद्य - ‍१८८ - सिरोली या सिरोली मएना (बाल कविता)

सिरोली या सिरोली मएना (बाल कविता)



छी मएने सनि,   वा मएने छी,
पर  चितकाबर   रंग   हमर ।
बोली  मीठ छी,  सएह  कारणेँ,
एहेन सनि  छी  नाम  हमर ।।*

केओ  कहथि  स्थान  सिरोई,
ताहिसँ  बनल  सिरोली  छै ।*
पर  मीठगर   बोलहि   कारण,
हम्मर तँऽ नाम सिरोली छै ।।*

साधारण मएना  सनि  ने  हम,
भेटब   घर - आङ्गन   बेसी ।
ढीठ  ओतेक  नञि  तेँ  हमरा,
देखब ओत्तहि, नञि जन बेसी ।।*

हल्लुक - पीयर लोल हमर छी,
नेने  जड़िमे   किछु   लाली ।
सुग्गा  सनि  अनुकरण  करी,
हमहूँ  तँऽ  मनुक्खक बोली ।।*



संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - पुर्वोत्तर भारतक मणीपुर राज्यमे एकटा स्थान अछि सिरोई / सिरोही जाहि ठाम सिरोई राष्ट्रिय उद्यान (SIROHI / SHIRUI NATIONAL PARK) या यैंगैंगपोक्पी लोकचाओ वन्यजीव अभयारण्य थिक जकर स्थापना सन् 1982 ई॰मे कयल गेल छल । अन्तर्जाल पर उपलब्ध जानकारी इएह कहैत अछि कि सिरोई नामक स्थानक आधार पर एहि मएनाक नाम सिरोई मएना पड़ल जे कि बादमे सिरोली मएना भऽ गेल । परञ्च हमरा ई बात पचि नञि रहल अछि कारण कि -

·        सिरोली मएनापूरा दछिनबारी एसियामे मैदानी (PLAINS) आ निचला तराई (LOWER FOOTHILLS) क्षेत्रमे पाओल जाइत अछि, तखन फेर मात्र मणीपुरहि के सिरोई केर विशेषण किएक ?

·       सिरोई राष्ट्रिय उद्यान केर स्थापना सन् 1982 मे भेल पर मिथिलामे एहि चिड़ै केर नाम सिरोलीबहुत पहिनहिसँ अछि (मिथिलाक किछु अतिवृद्ध महिला लोकनि बतओलन्हि) ।

·       अपना दिशि लोक सभक (विशेष कऽ किछु अतिवृद्ध जानकार महिला लोकनि) अनुसारेँ सिरोली (सिरोली मएना) केर बोली मएना (साधारण घरैया मएना) केर बोलीक अपेक्षा मधुर होइत अछि तेँ एकर एहेन नाम अछि ।

·        ई चिड़ै गाबएबला पक्षीक (SINGING BIRDS) श्रेणीमे आबैत अछि जे कि किछु सीमा धरि नामकरणक पाछाँ ओकर आबाजकेँ कारण होयबाक पुष्टि करैछ ।

* - सिरोली साधारण मएना जेकाँ ढीठ नञि होइत अछि आ तेँ घर आङ्गनमे जाहि ठाम मनुक्खक आबर-जात बेसी हो ताहि ठाम नञि देखाइ देत अछि । गाम-घऽरमे कने कात -करौटमे आ प्रायः छोट-छोट झुण्डमे सिरोली देखबामे आओत ।


* - पिञ्जरामे पोषला पर सिरोली सेहो सुग्गा जेकाँ मनुक्खक बोलीक नकल करैत देखल गेल अछि । 



मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍204म अंक (‍15 जून 2016) (वर्ष 9, मास 102, अंक ‍204) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।



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