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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Saturday, 4 June 2016

पद्य - ‍१८७ - लुक्खी (बाल कविता)

लुक्खी (बाल कविता)




छोट जीव, बड़ मोट छै नाङ्गरि,
पर ओ खिखीर नञि छै ।
अपना  दिशि  सौंसे  भेटैत छै,
बाड़ल  कत्तहु  नञि छै ।।

पैघ  छै  पछिला  टाङ्ग  दुहु,
अगिला बड़ छोट रहै छै ।
छोटकी  कंगारू  सनि  लागए,
पर  कंगारू  नञि  छै ।।*

फऽल - फूल - दाना   खाइए,
ने  घास - पात रूचै छै ।
अगिला पएरकेँ  हाथ बना ओ,
फऽल - फूल  पकड़ै छै ।।*

भूरा   रंगक   देह    ओकर,
वा  रंग जेना मटियाही ।
पाँच या  तीन टा  भेटत पीठेँ,
उज्जर - उज्जर धारी ।।*

टी - टी, टी - टी ध्वनि तीव्र,
ओ बेर - बेर  करै छै ।
संगहि नाङ्गरि उठा कऽ ऊपर,
हावामे ओ  डोलबै छै ।।*

आबहु ने चिन्हलहुँ तँऽ कहै छी,
लुक्खी ओ कहबै छै ।
धारीबाला    भारतमे     आ,
आस - पड़ोस भेटै छै ।।

विश्वमे सौंसे पसरल लुक्खी,
बहुत प्रकारक होइ छै ।
रंग जे हो, पर पीठ पर धारी,
अन्तऽ नञि भेटै छै ।।*



संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - कंगारू ऑस्ट्रेलियामे पाओल जाय बला एकटा जीव अछि । विदेशी जीव रहितहुँ आइ - काल्हिक बच्चासभ ओकरासँ खूब परिचित रहैत अछि - कारण थिक, आजुक पोथीसभ (“K” for KANGAROO), क्रिकेट नामक खेलक प्रचलन आ श्रव्य ओ दृश्य मिडिया पर कंगारूक विशेष चर्च । कंगारू, जिराफ आदि शब्द मैथिलीमे विदेशज शब्द भेल । मैथिली सेहो ओहि तरहक शब्दसभकेँ ठीक ओहिना आत्मसात कएने अछि जेना कि हिन्दी ओ आन भारतीय तथा विदेशी भाषासभ ।



* - एहि जीवक अगिला दुहु पएर छोट - छोट होइत छै जकर उपयोग ओ खएबा काल कोनहु बस्तुकेँ पकड़बाक लेल करैत अछि ।

* - प्रायः उतरबारी भारतमे भेटए बला लुक्खीक (NORTH INDIAN PALM SQUIRREL; Funambulus pennantii) पीठ पर पाँच टा उज्जर रेखा (धारी) होइत अछि जखनि कि दक्षिनबारी भारतक लुक्खीक (SOUTH INDIAN PALM SQUIRREL; Funambulus palmarum) पीठ पर तीन टा ।

* - ई जीव (लुक्खी) बैसल - बैसल टि - टि केर एक टा विशिष्ट ध्वनि निकालैत अछि आ संगहि अपन नाङ्गरिकेँ ऊपर उठाए हवामे झुलबैत रहैत अछि ।

*- मात्र भारतीय लुक्खीक पीठ उज्जर धारीसँ युक्त होइत अछि । विश्वमे भेटए बला आन लुक्खीक पीठ पर धारी नञि रहैत अछि ।



मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍203म अंक (‍01 जून 2016) (वर्ष 9, मास 102, अंक ‍203) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।




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