Pages

मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Wednesday, 20 January 2016

पद्य - ‍१३४ - बेङ्‌ग आ भेंक (बाल कविता)



बेङ्‌ग आ भेंक (बाल कविता)







देखू ! देखू !   छै   बेङ्ग ।
टर्र-टेँ,  टर्र-टेँ  करइछ  बेङ्ग ।।

हरियर - पीयर  ढाबुस  बेङ्ग ।
गाल फुला कोना बाजए बेङ्ग ।।

खत्ता - डबरा - पोखरि  बेङ्ग ।
मेघक लगितहि कुदकए बेङ्ग ।।

बेङ्गहि  सनि  देखू  ई भेंक ।
पर ने टर्र - टर्र करइछ भेंक ।।

बौआ फेंकलक  जुमा कऽ ढेप ।
डुम्मी काटि कऽ भागल बेङ्ग ।।

बेशी   सर्दी,    बेशी   घाम ।
सहि ने पाबए  ओक्कर चाम ।।

तेँ  बरिसातक  पहिने - बाद ।
माटिक  तऽर  रहए  निर्बाध ।।


संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

                  देखबामे एकरंगाह होएबाक कारण भेंक दादुर मैथिली साहित्यमे − विशेषतः काव्य साहित्यमे − बहुधा बेङ्ग केर पर्यायवाचीक रूपमे प्रयुक्त होइत अछि परञ्च ई दुहु वास्तवमे अलग - अलग जीव थिक । बेङ्ग केर त्वचा स्निग्ध आ चिक्कन होइत अछि, ओकर जबड़ामे दाँत होइत अछि, नर बेङ्ग टर्र -टेँ केर अबाज निकालि सकैत अछि जखनि कि भेंक केर त्वचा सुखाएल आ खरखर होइत अछि, ओकरा दाँत नञि होइत अछि तथा ओ बेङ्ग जेकाँ अबाज नञि निकालि सकैत अछि । बेङ्गक बच्चाकेँ बेङ्गची आ भेंकक बच्चाकेँ भेंकशिशु कहल जाइत अछि जकर प्रारम्भिक अकार माछक बच्चा सनि होइत अछि आ विभिन्न स्तरक कायान्तरण प्रक्रिया (METAMORPHOSIS) केर बाद चिरपरिचित वयस्क स्वरूपकेँ प्राप्त करैत अछि ।

·        बेङ्ग / बेंग (मैथिली) = मेंढक (हिन्दी) = FROG (ENGLISH) = Rana spp. & Others (जैववैज्ञानिक नाम) 

·        भेंक / दादुर (मैथिली) = भेंक / दादुर (हिन्दी)  = TOAD (ENGLISH) = Bufo spp. & Others (जैववैज्ञानिक नाम)


              बेङ्गभेंक - ई दुहु उभयचर वर्गक जन्तु अछि अर्थात पानि आ माटि दुनु स्थानमे विचरण करैछ ( उभय = दुहु / दुनु तथा चर = विचरण कएनिहार / रहनिहार) । उभयचर वर्गकेँ अंग्रेजीमे क्लास एम्फिबिया (Class AMPHIBIA)  (Amphi = Both & Bion/Bios  = Life) कहल जाइत अछि । उभयचर वर्गक जन्तुसभ शीतरक्तीय / अनियततापी / बाह्यतापी (COLD BLOODED / POIKILOTHERMIC / ECTOTHERMIC) जीव होइत अछि यानि कि ओकरसभक शरीरक तापमान वातावरणक तापक्रमक अनुसार घटैत बढ़ैत अछि । तेँ वातावरणक तापमानक बहुत बेशी कम होएब आ बहुत बेशी बढ़ब एहि तरहक जीव सभक लेल जानमारुक होइत अछि । एहना अवस्थामे ओ सभ जमीनक भीतर नुका जाइत अछि । चुँकि जमीनक भीतरक तापमान जमीनक ऊपर जेकाँ घटैत - बढ़ैत नञि अछि तेँ ओ एतए सुरक्षित रहैत अछि । एहि समय ओ जीवसभ बेशी हलचल नञि करैत अछि आ जिउबाक लेल पुर्व सञ्चित भोजन (चर्बी) पर निर्भर करैछ । गर्मीक समयमे एहेन प्रक्रियाकेँ गृष्मनिद्रा (AESTIVATION / ESTIVATION) आ ठण्ढीक समयमे शीतनिष्क्रियता (HIBERNATION) कहल जाइत अछि । शरीरक तापसन्तुलनक (THERMOREGULATION) एहि तरहक प्रक्रिया सरिसृप वर्ग (Class REPTILIA) केर प्राणीसभमे (यथा - साँप आदिमे) सेहो देखल जाइत अछि । पक्षी आ स्तनपायी वर्ग (Class AVES & MAMMALIA) केर जीव (मनुक्ख सेहो) ऊष्णरक्तीय / नियततापी / स्थिरतापी / अन्तःतापी / अन्तर्तापी (WARM BLOODED / HOMEOTHERMIC / ENDOTHERMIC) होइत अछि अर्थात ओकर सभक शरीरमे एहेन व्यवस्था रहैत छै कि वातावरणक तापक विरुद्ध ओ सभ अपन शरीरक तापमानकेँ एकटा निश्चित सीमामे बनओने रहैछ ।


मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍193म अंक (‍01 जनबरी 2016) (वर्ष 9, मास 97, अंक ‍193) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।


No comments:

Post a Comment