Pages

मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Wednesday, 20 January 2016

पद्य - ‍१३५ - बिढ़नी आ पचहिया (बाल कविता)



बिढ़नी आ पचहिया (बाल कविता)








ई बिढ़नी, ओ बिढ़नीक खोंता,
बुझलह   की  ने  बौआ ।
दूरे  रहिहह,  काटि  लेतह,
कटिते बनि जएबह कौआ ।।

बिढ़नी कटतह, थुम्हा फुलओतह,
करए  ने  जाह  उकाठी ।
सम्हरि कऽ खहिहह आमक गाड़ा,
देखलक  बिढ़नी   बाटी ।।

आमक महिना अबितहि बिढ़नी,
जानि  कतऽसँ  आबए ।
आमक चोभा लगबए बुच्ची,
काटि कऽ तखने भागए ।।

मधुमाछी सनि देखबामे अछि,
पर नञि  मऽध बनाबए ।
पर खोँतामे एक्कहि रंगक,
कोठरी  कोना  बनाबए !!

कम बिषाह पीयर बिढ़नी,
कहबए साधारण बिढ़नी
लाल आ कारी देहमे धारी,
इएह  पचहिया बिढ़नी।।


संकेत आ किछु रोचक तथ्य -
·    
          बिढ़नी आ पचहिया दुहु एकरँगाह होइतहुँ एक-दोसरासँ किछु विशिष्ट अन्तर रखैछ ।
·        अंग्रेजीमे वास्प  (WASP) शब्दसँ उड़एबला कीड़ाक एकटा बहुत पैघ समुदायक बोध होइत अछि जाहिमे बिढ़नी ओ पचहियाक अतिरिक्त आन बहुत तरहक सम्बन्धित कीड़ासभ अबैत अछि ।
·        बिढ़नी गाछ-पातमे उपस्थित सेल्युलोज (CELLULOSE) नामक पदार्थकेँ अपना थूक या लेरमे (SALIVA) सानि अपन खोंताक (NEST) निर्माण करैछ । सेल्युलोज ओएह पदार्थ अछि जाहिसँ कागत (PAPER) बनैत अछि । तेँ एकरा अंग्रेजीमे पेपर वास्प (PAPER WASP) कहल जाइत अछि । एकर खोंतामे २०० सँ ५०० धरि कोठरी भऽ सकैत अछि आ हरेक कोठरी आकारमे एक समान रूपसँ षटकोणीय (HEXAGONAL) होइत अछि । एकर खोंताकेँ एकटा विशिष्ट छत्ता सनि आकार होइत अछि तेँ एकर खोंताकेँ छत्ता (COMB) आ बिढ़नीकेँ अंग्रेजीमे अम्ब्रेल्ला वास्प (UMBRELLA WASP) सेहो कहल जाइत अछि ।

·        समान्य रूपसँ भेटए बला पीयरका बिढ़नीकेँ अंग्रेजीमे यॅलो पेपर वास्प  (YELLOW PAPER WASP) कहल जाइत अछि । एकरअतिरिक्त आन कतेको तरहक बिढ़नी होइत अछि किछु एक रंगक तँऽ किछु पर दोसर रंगक धारी (BANDS) रहैत अछि ।

·        मुख्य रंग (पीयर या नारंगी या आन) पर दोसर रंगक (कारी या भूरा) धारी (BANDS)  पचहियामे सेहो भेटैत अछि पर पचहिया सामान्य बिढ़नीसँ आकारमे किछु पैघ होइत अछि । पचहियाकेँ अंग्रेजीमे हॉर्नेट (HORNET) कहल जाइत अछि । ई बिढ़नीएक किछु पैघ आ विशिष्ट रूप मानल जाइत अछि तेँ कतेक ठाम एकरा वास्प (WASP) या हॉर्नेट वास्प (HORNET WASP) कहि सेहो संबोधित कएल जाइत अछि ।

·        सामान्यतः पचहियाक दंश बिढ़नीक दंशसँ बेशी खतरनाक होइत अछि । पचहियाक दँशसँ मनुक्खक मृत्युक घटना बेशी सोझाँ आयल अछि ।  


मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍193म अंक (‍01 जनबरी 2016) (वर्ष 9, मास 97, अंक ‍193) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।


No comments:

Post a Comment