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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Sunday, 17 July 2016

पद्य - ‍२०‍१ - खड़गोश या खरगोश (बाल कविता)

ड़गोश या खरगोश (बाल कविता)



संस्कृतक जे शशक - शशा छी,
तकरा  बूझियौ खढ़िआ ।*
इएह  भारतमे  छल  पहिनेसँ,
काछुसँ  हारल खढ़िआ ।।*

एकरहि सनि एक आओर जीव,
अन्तऽसँ भारत आयल ।
खड़ेहहि सनि देखबामे छल तेँ,
ओ खड़गोश कहाओल ।।*

खड़ेहा ने  पोशुआ कत्तहु अछि,
छी ओ शुद्ध - बनैया ।
खड़गोशक  दुहु  अछि प्रकार,
पोशुआ आओर बनैया ।।*

खढ़िआ केर आबास प्राकृतिक,
छी धरती केर  ऊपर ।
खड़गोशक अछि बास बियरिमे,
जे धरती केर  भीतर ।।*

खढ़िआ केर बच्चा  जन्महिसँ,
दृष्टियुक्त  स्वनिर्भर ।
खड़गोशक  नवजात शिशु सभ,
असहाय ओ आन्हर ।।*





संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - क्रमिक जैविक उद्विकाश वा जैविक क्रमविकाशमे (ORGANIC EVOLUTION) कोनहु जीवक उत्पत्ति जाहि भूभाग वा भूखण्ड पर भेल अछि, ओ जीव एखनहु यदि ताही भूखण्ड पर पाओल जाइत अछि तँऽ ओहि जीवविशेषकेँ ओहि विशेष भूखण्डक मूल जीव-वंश (NATIVE GENUS / GENERA)” या मूल जीव-जाति (NATIVE SPECIES)” कहल जाइत अछि । खढ़िआ या खड़ेहा (HARE) केर किछु जाति (SPECIES) विश्वक आन ठामक अतिरिक्त भारतहु केर मूल निवासी (NATIVE SPECIES) अछि । ओ भारतमे आदिकालहिसँ रहैत आबि रहल अछि । तेँ संस्कृतक शशा/शशक शब्दसँ वास्तवमे जाहि जीव-जातिक बोध होइत अछि से खड़ेहा वा खढ़िआ थिक,; नञि कि - खड़गोश ।

* - पञ्चतन्त्रमे जे आलसी शशक आ सतत प्रयत्नशील कच्छप केर प्रशिद्ध खिस्सा अछि ताहिमे शशकमाने खढ़िआ या खड़ेहा अर्थ लेबाक चाही नञि कि खड़गोश

* - भारतक खड़गोश बेसीतर पोशुआ खड़गोश अछि जे कि यूरोपक खड़गोश (EUROPEAN RABBIT (Oryctolagus cuniculus) अछि आ भारत केर मूल निवासी नञि अछि । खड़गोशक सभ वंश वा जाति भारतक लेल आयातित वा समावेशित वंश वा जाति (INTRODUCED GENUS / SPECIES) थिक । ओकर रंग - रूप भारतक खढ़िआ या खड़ेहासँ मिलबाक कारण ओकरा खड़गोश कहल जाय लागल ।

* - खढ़िआ/खड़ेहा पोशुआ (DOMESTIC) नञि होइत अछि । ओ मात्र बनैया (WILD) होइत अछि । मुदा, खड़गोश - बनैया आ पोशुआ - दुहु प्रकारक होइत अछि ।

*- खढ़िआ/खड़ेहा खऽढ़, खरही या आन ताहि तरहक प्राकृतिक झाड़ी सदृश (BUSHY) जंगली आवास - क्षेत्रमे रहैत अछि । ओ रहबा लेल बियरि (बिल) नञि बनबैत अछि अपितु जमीनहि पर अऽढ़ जगह पर सुखायल घास - फूस केँ जमा कए रहबा लेल अस्थाई घऽर बनबैत अछि । मुदा, खड़गोश हमेशा जमीनक भीतर बियरि या बिल (UNDERGROUND BURROW / RABBIT HOLES) बना कऽ रहैत अछि ।

*- खड़गोशक जन्मौटी बच्चासभ जन्मक समयमे आन्हर होइत अछि, ओकर देह पर रोइञा नञि रहैत अछि आ स्वतन्त्र रूपसँ चलबा - फिरबामे असहाय होइत अछि । तकर विपरीत, खढ़िआ/खड़ेहाक जन्मौटी बच्चासभ (नवजात शिशुसभ) केर आँखि पुर्ण विकसित ओ दृष्टियुक्त होइत अछि, ओकर देह पर पर्याप्त रोइञा होइत अछि आ ओ सभ स्वतन्त्र रूपसँ चलबा - फिरबा योग्य होइत अछि ।

किछु विशेष बात -

अपना दिशि पहिने बूढ़-पुरान लोकनि कहैत छलाह - खढ़िआ पोख नञि मानैत अछि । ताहि वक्तब्यसभसँ ध्वनित होइत अछि जे पहिने पोषुआ शब्दमे मुर्धन्य षहोइत छल जे क्रमशः तालव्य शदन्त्य स मे बदलैत गेल । तेँ हम उपरुका कविता ओ चित्रमे पोशुआ या पोसुआ केर स्थान पर पोषुआ शब्द जानि-बूझि कऽ प्रयोग कयल अछि । एहि क्रममे एकटा बात आओर जे मैथिलीक बूढ़ या बूढ़ाक अर्थ हिन्दीक बूड्ढा नञि कऽ देबाक चाही । हिन्दीक बुड्ढा अपमानसूचक थिक जखनि कि मैथिलीक बूढ़ा या बूढ़-पुरान (अथवा बूढ़ - पुरैनिञा) केर संग सम्मान सूचक क्रिया वा सहायक क्रिया आबैत अछि ।



मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍205म अंक (‍01 जुलाई 2016) (वर्ष 9, मास 103, अंक ‍205) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।

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