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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Sunday, 17 July 2016

पद्य - ‍२०४ - मधुमाक्षी या मधुमाछी (बाल कविता)

धुमाक्षी या मधुमाछी (बाल कविता)



मधुमाक्षी  हम  मऽध  बनाबी,  सब जनैत छी अपने ।
मऽध अहाँ जे खाए रहल छी,  अपना लए रही रखने ।।*

छत्ता हऽम छी लगबैत कोनहु, ऊँच भवन या गाछ पर ।
जोगबी, मोम आ मऽध बनाबी,  सर्दीमे देत काज बड़ ।।*

हम नञि छी  मरखाह, अनेरो  नञि काटैत छी ककरो ।
होइ छी  हम खिसियाह, जखन खतड़ा बुझाइए हमरो ।।*

हमरा  कटला  पर  बौआकेँ,  याद  आबै छन्हि नानी ।
मजबूरी  छल  तेँ कटलहुँ,  हम  मरब अवश्ये  जानी ।।*

हम्मर छत्ता  बहुत  पैघ,  बिढ़नी - छत्ता  केर  आगाँ ।
हर कोठरी छी  बनल  मोमसँ,  कागत केर ने खाका ।।*

हमरो ओहिठाँ  बड़ मजूर,  किछु नर आ एकटा रानी ।
आँच जँ  रानी या छत्ता  पर,  हो  मजूर  बलिदानी ।।*

मऽध बहुत अनमोल,  मजूरक मेहनति केर छी सत्त्व ।
ई  तँऽ अछि  सद्यः अमृत,  रखने सभ पोषक तत्त्व ।।

आइ कतेको ठाम हमर, होइए  व्यावसायिक  पालन ।
दूध आ अण्डा सनि हमहूँ, छी करैत मऽध उत्पादन ।।*





संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - मधुमाक्षी द्वारा मऽध वस्तुतः शीतकालीन वा आपातकालीन खाद्य भण्डारक रूपमे सञ्चित कएल जाइत अछि । आन कीड़ासभ (ARTHROPODS) जेकाँ मधुमाक्षी सेहो शीतरक्तीय प्राणी (COLD BLOODED / POIKILOTHERMIC ORGANISMS) अछि मतलब कि ओकर शरीरक भीतरी तापमान मनुक्ख जेकाँ नियत (CONSTANT) नञि रहैत अछि आ वातावरणक तापमानक संग घटैत-बढ़ैत रहैत अछि । वातावरणक तापमान 10°C (=50°F)सँ नीचाँ खसला पर मधुमाक्षी उड़ान नञि भरैछ आ छत्ताक केन्द्रिय भागमे जमा भऽ जाइछ । एहि तरहक घटनाकेँ शीत समूहन (WINTER CLUSTERING) आ एहि तरहें एकत्रित भेल मधुमाक्षीक समूहकेँ शीत-समूह (WINTER CLUSTER) कहल जाइत अछि । शीत समूहित श्रमिक मधुमाक्षी अपन शरीरमे सिहरन या कम्पन (SHIVERING) कऽ कऽ ऊष्मा (गर्मी) उत्पन्न करैछ जाहिसँ छत्ताक आन्तरिक भागक तापमान 27°C (=81°F) धरि बनल रहैछ । एहि विकट समयमे आहार ओ तत्पश्चात कम्पनसँ ऊष्माक उत्पत्ति लेल छत्ताक सभ मधुमाक्षी छत्तामे पुर्वसञ्चित मऽधहि पर आश्रित रहैछ । एहि प्रकारेँ मधुमाक्षी आपातकालमे भोजन व ताप-नियण्त्रणक लेल एहि सञ्चित मऽध केर उपयोग करैत अछि ।

* - मधुमाक्षी बिढ़नी आ पचहिया जेकाँ अनेरहु मरखाह प्रवृत्तिक (OVER-AGGRESSIVE NATURE) नञि होइत अछि । जखन मधुमाक्षीक छत्ता या समूहक रानी पर मनुक्ख वा कोनहु आन जीवसँ (जेना कि - बिढ़नी, पचहिया, घियारी कीड़ी, आन दलक घुसपैठिया रानी मधुमाक्षी) खतड़ाक आभास होइत अछि तखनहि प्रायः मजूर-मधुमाक्षी ओकरा काटैत (BEE STINGS) अछि । ककरहु काटलाक बाद काटनिहारि मधुमाक्षीक विष-ग्रण्थि सहित दंश-शुण्डिका (STING & ASSOCIATED VENOM SAC) ओकर शरीरसँ टूटि कऽ अलग भऽ जाइत अछि आ काटनिहारि मधुमाक्षीक तत्काल मृत्यु भऽ जाइछ ।

* - बिढ़नी ओ पचहिया आदिक छत्ता ओकर लेरसँ सानल अर्धपाचित काठसँ बनल रहैत अछि जकर मुख्य रासायनिक घटक सेल्युलोज (CELLULOSE) होइत अछि । इएह घटक कागज/कगाद (PAPER) केर सेहो होइछ । तेँ अंग्रेजीमे बिढ़नी ओ पचहिया आदिकेँ पेपर वॉस्प (PAPER WASP) कहल जाइत अछि । एकर विपरीत, मधुमाक्षीक छत्ता मोमसँ (WAX) बनल रहैत अछि । ई मोम (WAX) श्रमिक मधुमाक्षीसभ परागकणकेँ लेरसँ सानि अर्धपाचित कऽ कऽ बनबैत छथि तेँ ओकरा संस्कृतमे मधूच्छिष्ट कहल जाइत अछि ।

* - मधुमाक्षी वास्तविक सामाजिक माक्षी (EUSOCIAL BEES) केर समूहमे आबैत अछि । ओकर हरेक समूह या छत्तामे (HERD / BEE SWARM / HONEYCOMB) एकटा रानी मधुमाक्षी (QUEEN BEE) किछु हजार नर मधुमाक्षी (DRONE BEES) आ दसहु हजार श्रमिक वा मजूर मधुमाक्षी (WORKER/NURSE BEES) रहैत अछि । पराग एकत्र कऽ कऽ मोम (छत्तामे कठरी निर्माण लेल) ओ मऽध (आपातकालीन आहार लेल) बनायब ओ छत्ताक सुरक्षा करब − ई सभटा काज श्रमिक वा मजूर मधुमाक्षीक थिक ।

*- भारत ओ विश्वक आन ठामसेहो मधुमाक्षी - पालन (APICULTURE; API = Apis = मधुमाक्षीक वंशक प्राणीशास्त्रीय नाम आ CULTURE = पालन) एकटा पैघ व्यवसायक रूपमे विकसित भऽ चुकल अछि ।

मधुमक्षिका मधुमाक्षी मधुमाछी







मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍205म अंक (‍01 जुलाई 2016) (वर्ष 9, मास 103, अंक ‍205) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।




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