Pages

मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Sunday, 17 July 2016

पद्य - ‍१९९ - घियारी कीड़ा या कुम्हरा भेम्ह (बाल कविता)

घियारी कीड़ा या कुम्हरा भेम्ह (बाल कविता)



ई की छियै ? − घियारी छै ।
कीड़ा  कोन ? − घियारी छै ।
माटिक सुन्नर घऽर आ घऽरक बासी - दुहु घियारी छै ।।*

कुम्हरा भेम्ह छी एकरे नाम ।
बौका भेम्ह कहए किछु ठाम ।
भेम्हसँ भम्हरा नञि बुझू, ई ओहिसँ अलग घियारी छै ।।*

कोन प्रयोजन ? − रहबा लए ।
अण्डा - बच्चा  पोषबा  लए ।
बहुबिध छैक “घियारी-कीड़ी”,  तेहने “घऽर-घियारी” छै ।।*

पैघ घियारी − फूल चूसैए ।
अण्डा - बच्चा एतए रहैए ।
ठूसल मारि पचहिया-बिढ़नी, ई कोन बात नियारी छै ।।*

अण्डासँ  निकसल  बच्चा ।
जिउतै ओहि बिढ़नीकेँ खा ।
पैघ हैत, उड़ि जैत फेर ओ, जाहि ठाँ फूल-कियारी छै ।।*

माटि सानि  थूकेँ बान्हल ।
या अधपच काठक ठानल ।
निर्माणक साहित्य विविध छै,  बहुविध रूप घियारी छै ।।*





संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - साधारणतः एहि तरहक माटिक कलाकृतिकेँ आ ओकरा बनबएबला कीड़ा या कीड़ी दुहुकेँ घियारी कहल जाइत अछि । भ्रम नञि हो तेँ एहि तरहक कीड़ाकेँ घियारी कीड़ा या घियारी कीड़ी कहल जा सकैत अछि ।

* - घियारी कीड़ा या घियारी कीड़ी केँ बहुत ठाम कुम्हरा भेम्ह कहल जाइत अछि । भेम्ह नाम होयबाक कारणेँ एकरा भम्हरा (भँवरा) नञि बूझल जाए । ई भम्हरासँ (भँवरासँ) एकदम्मे भिन्न अछि । उकाठी कएला पर कटबाक प्रवृत्तिक कारण सम्भवतः एकरा संगे भेम्ह शब्द जुड़ल अछि । भम्हरा (भँवरा) जेकाँ उड़बा काल भम्-भम् केर आबाज नञि होयबाक कारण एकरा बौका भेम्ह सेहो कहल जाइत अछि ।

* - विश्वमे घियारी किड़ीक बहुते प्रकारसभ अछि तहिना ओकरा द्वारा बनाओल गेल घऽर (घियारी) केर विविध रूप - रंग । अंग्रेजीक MUD DAUBER WASP केर अधिकांश जाति आ POTTER WASP / MASON WASP सभ घियारी शब्दक अन्तर्गत आबैछ । एहि तरहेँ करीब 200 (दू सए) वंशक (GENERA) 3200 जातिक (SPECIES) समावेश घियारी किड़ीक रूपमे अछि ।

* - वयस्क घियारी कीड़ी एहि घियारीरूपी घऽरमे नञि रहैत अछि । स्त्री घियारी किड़ी एहि घऽरकेँ बनबैत अछि । ओहिमे अण्डा दैत अछि । अण्डा देबासँ पहिने ओहिमे जीविते बिढ़नी आ पचहियासभकेँ अपन दंशसँ अपाहिज कऽ कऽ ठूसि दैत अछि । घियारी किड़ीक अण्डासँ जखन बच्चा निकलैत अछि तँऽ ओ सभ एहि बिढ़नी आ पचहियासभकेँ खा कऽ पैघ होइत अछि । पैघ (वयस्क) भेला पर ओसभ ओहि घियारीकेँ छोड़ि भागि जाइत अछि आ फूलक रस पिउबि अपन शेष जिनगी निमाहैत अछि । सम्भवतः इहो एकटा कारण थिक जे एकर मैथिली नामक संग भेम्ह शब्द जुड़ल अछि ।

*- किछु घियारी माटिकेँ घियारी कीड़ी अपन थूकमे (SALIVA,लेर) सानि कऽ बनबैत अछि, तेँ कुम्हरा भेम्ह नाम पड़ल । किछु घियारी किड़ी घियारी बनएबाक लेल अधपच काठक (SEMI DIGESTED CELLULOSE, अर्धपाचित काष्ठ) प्रयोग करैछ ।



मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍205म अंक (‍01 जुलाई 2016) (वर्ष 9, मास 103, अंक ‍205) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।

No comments:

Post a Comment