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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Sunday, 14 February 2016

पद्य - ‍१५९ - कठखोद्धी या कठखोधी (बाल कविता)

कठखोद्धी या कठखोधी (बाल कविता)




काठ  खोधै छै  अपना  लोलसँ,
कहबै   छै    तेँ    कठखोद्धी ।
जे धरती  पर  माटि  खोधै  छै,
से  ने  बुझियौ   कठखोद्धी ।।

काठ  खोधि   बनबइए  धोधरि,
गाछे  -  गाछे    कठखोद्धी ।
गाछे  नञि  लकड़ीक  उपस्कर,
खाम्हो   खोधैछ  कठखोद्धी ।।

माटिखोद्धी   केर  पातर  लोल,
कठखोद्धी   केर   मोट   छै ।
माटिखोद्धी केर  नमगर  लोल,
कठखोद्धीक  किछु  छोट छै ।।

माटिखोद्धी केर  माथक कलगी,
पीयर  आओर   विभक्त   छै ।
कठखोद्धी  केर  लाले   टुहटुह,
जँ  छै   तँऽ   संशक्त   छै ।।*

पीठ - पाँखि पर स्वर्णिम पीयर,
मूल   रंग   चितकाबर   छै ।
अपना  ठाँ  इएह  बेसी  भेटत,
जगक विविधता  व्यापक छै ।।*

चिड़ै छै पर गाछहु पर ओ तँऽ,
सरपट   दौड़ै - भागै    छै ।*
नाङ्गरिकेँ ओ आड़* बना कऽ,
टिका  गाछ  पर  बैसए छै ।।

लोलसँ ठक-ठक करइत गाछमे,
धोधरि   सेहो   बनाबै   छै ।
अपनहु  ओहिमे  बास  करैए,
आ   दोसरोकेँ   बसाबै  छै ।।*

काठक   अन्दरमे   जे  कीड़ा,
परजीवी   बनि   पैसल  छै ।
तकरा खा कऽ  पेट  भरए  ओ,
गाछक  जिनगी   बढ़बै  छै ।।*


संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - माटिखोद्धी केर माथक कलगी नारंगी-पीयर रंगक ओ अरीय रूपसँ विभक्त होइत अछि । जखनि कि आपना दिशि सामान्य रूपसँ भेटए बला कठखोद्धीक माथक कलगी लाल रंगक होइत अछि आ माटिखोद्धीक कलगीक तुलनामे संशक्त होइत अछि । विश्वक आन भाग मे पाओल जाए बला कठखोद्धीक किछु प्रजातिमे या तऽ कलगी नञि होइत अछि या आन रंगक सेहो होइत अछि ।


* - विश्वमे कठखोद्धीक बहुत तरहक बगए-बानी अछि पर अपना दिशि बेसीतर एहने भेटैछ ।

* - चिड़ै होयबाक बावजूदो ई गाछ पर उदग्र रूपेँ (VERTICALLY) तेजीसँ दौड़ि सकैत अछि । ई एकर विशेषता अछि ।

* - आड़ = गाछ पर अपनाकेछ एक स्थान पर बेसी काल टिकएबाक लेल आ काठ खोधए काल देह हिलए-डोलए नञि ताहि हेतु कठखोद्धी अपन नाङ्गरिकेँ मजगूत आड़ जेकाँ उपयोगमे आनैत अछि ।

*- माटिखोद्धी गाछमे वा काठमे धोधरि नञि बनबैत अछि जखनि कि कठखोद्धी बनबैत अछि । ओहि धोधरिमे पहिने अपने रहैत अछि आ बादमे छोड़ि देला पर ओहि परित्यक्त धोधरिकेँ आन चिड़ै (जेना कि - सुग्गा) वा दोसर कोनहु जीव ओकरा अपन खोंता या घऽरक रूपमे प्रयोग करैछ ।

*- गाछक अन्तः परजीवीक (ENDO PARASITES) रूपमे जे कीड़ा-मकोड़ा गाछमे घुसल रहैत अछि आ गाछक लेल नोकशानदायक होइछ तकरा आ तकर अण्डा ओ बच्चाकेँ कठखोद्धी खा जाइत अछि । एहि तरहेँ कठखोद्धीक पेट भड़ैत अछि आ संगहि गाछ सभक आयुर्दा बढ़ैत अछि ।


मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍195म अंक (‍01 फरबरी 2016) (वर्ष 9, मास 98, अंक ‍154) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।



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