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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Saturday, 1 August 2015

पद्य - ‍१‍१४ - ईद छै कि होली छै (बाल कविता)

ईद छै कि होली छै (बाल कविता)


साभार सौजन्य - pixabay.com (free download)



ईद   छै   कि   होली   छै ।
दुर्गा − छठि − दिवाली  छै ।
हमरा लए हर दिन सुन्नर, कारण इस्कूलमे छुट्टी छै ।।

कक्कर पाबनि, के मनबै छै ।
कहाँ बात से  एतेक फुरै छै ।
हमसभ खुश छी इएह सोचि कऽ, आबै बला छुट्टी छै ।।

ककर जन्म आ कक्कर बरषी ।
सभटा   सरकारक  मनमर्जी ।
हम बच्चासब इएह सोचै छी, एक दिन फेरो छुट्टी छै ।।

रौद छै कड़गर, लूऽऽ चलै छै ।
बर्खा - बुन्नी,  शीतलहरी छै ।
एतेक प्रखर हो हर मौसिम जे, होअए घोषणा - छुट्टी छै ।।



30 JULY 2015 कऽ प्रकाशनार्थ मिथिला दर्शन केर सम्पादकीय कार्यालयकेँ प्रेषित ।

तत्पश्चात,


मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍216म अंक (‍15  दिसम्बर 2016) (वर्ष 9, मास 108, अंक ‍216) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।

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