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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Saturday, 8 December 2012

पद्य - ९‍१ - मृगतृष्णा मे पानि तकै छी


मृगतृष्णा  मे  पानि  तकै  छी


मृगतृष्णा  मे  पानि  तकै  छी,
कोना  भेटत  से  अँहीं  कहू ?
छाँह पकड़बा केर  इच्छा  अछि,
कोना भेटत  से  अँहीं  कहू ??

अग्निराशि   पर  खाली  पएरेँ,
निःसंशय  भऽ   कोना  चलू ?
काँट  भरल  सभ  बाट-घाट मे,
बिनु आहत भऽ  कोना चलू ??

रोपल बाँस आ आम आश अछि,
फड़त  कोना  से  अँहीं  कहू ?
सौंसे  विष  केर  धार   बहइए,
अमिय कहाँ  से  अँहीं  कहू ??

राति अन्हरिया,  पुनमि बाद पख,
चान भेटत  कोना - कतए कहू ?
धारक गति अतिप्रबल  पूब दिशि,
जायब  पच्छिम  कोना  कहू ??



उच्चारण संकेत :-



क्रम संख्या


लिखित शब्द


अभिप्रेत उच्चारण

पानि
पाइन, पइन, पैन
अछि
अइछ
अग्निराशि
अग्निराशि
राति
राइत
अन्हरिया
अन्हरिया, अन्हैरया
पुनमि
पुनैम
गति
गइत
अतिप्रबल
अतिप्रबल, अइतप्रबल
दिशि
दिशि, दिश
१०
जानि
जाइन
११
कत’
कते
१२
छाड़ि
छोइड़
१३
सनि
सइन, सन
१४
अतिशय
अतिशय, अइतशय



डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”                                
एम॰डी॰(आयु॰) कायचिकित्सा                                   


विदेहपाक्षिक मैथिली इ पत्रिका, वर्ष ,  मास ५८ ,  अंक ‍११६, ‍१६ अक्टूबर २०१२ मे प्रकाशित ।





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