Pages

मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Friday, 6 April 2012

पद्य - ५५ - कोइली कानय भोरहि सँ


कोइली कानय भोरहि सँ
(कविता)


गुरुदेव श्री रबिन्द्र नाथ ठाकुर





स्व॰ महेन्द्र झा आ श्री रबिन्द्र नाथ ठाकुर




याद  अबैछ  गुरुदेव  रबिन्द्रक, *
कोइली  कानय  भोरहि  सँ ।
मिथिला केर इतिहास लिखायल,
सभदिन  अगबे  नोरहि  सँ ।।



लागल  कोन  कुहेस  हटए  नहि,
सुर्य  अस्त  छथि   भोरहि  सँ ।
मिथिला मैथिल   केर   दुर्गति,
देखथि  विद्यापति  ओरहि सँ ।।



जन्मभूमि   जननी      भाषा,
बिसरि गेलह  बढ़ि स्वर्गहु सँ ।
हे  मैथिल !   धिक्कार  थिकह,
जिनगी  बत्तर  छह नर्कहु सँ ।।



लाज होइछ निज जिनगी पर,
हमसभ  बत्तर छी  चोरहि सँ ।
शपथ  लैत  छी,  हम  लड़ब,
जत होयत हमरा जोरहि सँ ।।



तन मन धन जत भाग हमर,
मिथिला - मैथिली लए अर्पित अछि ।
हमर  लेखनीक  हरेक  शब्द,
निज  भाषा  लए संकल्पित अछि ।।



आशीष दियऽ हे माए मैथिली,
पुर्ण करी निज इच्छा  हम ।
तोड़ि सकी  हर एक  व्यूह केँ,
करी शत्रु  केर  चेष्टा भंग ।।





* गुरुदेव रबिन्द्र = मैथिलीक सुप्रशिद्ध कवि व लेखक श्री रबिन्द्र नाथ ठाकुर (नञि कि बाङ्गालक स्व॰ रविन्द्रनाथ टैगोर) । नेनपनहि सँ हमर कान मे जे पहिल मैथिली गीत गूँजल आ हमर स्मृति पटल पर मैथिली साहित्यक प्रति अटूट सिनेह ओ निष्ठा जगओलक से छल श्री रबिन्द्र नाथ ठाकुरश्री जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ जीक गीत सभ । ओहि समय मे हिनक गीत सभ ततेक ने प्रशिद्ध छल जे गाम सँ पटना धरि हरेक गोटेक ठोर पर अनायासहि अबैत रहैत छल । मञ्च पर श्री रबिन्द्रजी आ स्व॰ महेन्द्रजीकेँ सुनबाक सौभाग्य बहुत बाद मे पटनाक विद्यापति स्मृति पर्व समारोह मे भेटल आ भेटैत रहल परञ्च गाम घऽर मे बहुत नेनपनहि सँ हर वयसमूहक लोक सभ सँ सुनल हुनिक गीत सभ हमरा प्रेरित करैत रहल । ताहू मे श्री रबिन्द्रजीक गीत “की थिक मिथिला, के छथि मैथिल” हमर मोन मस्तिष्क केँ हमेशा झकझोड़ैत रहल आ एखनहु झकझोड़ैत रहैत अछि, एहि प्रश्नक सही उत्तर तकबाक लेल बेर – बेर प्रेरित करैत रहैत अछि आ शायद आजीवन करैत रहत । तेँ ओ लोकनि हमर मैथिली साहित्यक क्षेत्र मे गुरु भेलाह ।


ओना तँ हमर ई गीत २५ – ०३ -‍ १९९८ कऽ लिखल गेल छल । पर गुरुदेव श्री रबिन्द्र नाथ ठाकुरजीक हुनक ७७म जन्मदिनक अवसरि पर हुनिका प्रति आदर व्यक्त करैत आइ ई गीत प्रकाशित कए रहल छी ।  हुनिक जन्म ०७ अप्रिल ‍१९३६ ई॰ कऽ पुर्णिञा जिलाक धमदाहा गाँव (दक्षिणबारि टोल) मे भेल छलन्हि ।





डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”                                
एम॰डी॰(आयु॰) कायचिकित्सा                                   
कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एण्ड रिसर्च सेण्टर, निगडी प्राधिकरण, पूणा (महाराष्ट्र) ४११०४४

विदेहपाक्षिक मैथिली इ पत्रिका, वर्ष , मास ५२ , अंक ‍१०३ , ‍०१ अप्रिल २०१२ मे “स्तम्भ ३॰७” मे प्रकाशित ।





No comments:

Post a Comment