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मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

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Sunday, 25 October 2015

पद्य - ‍१‍१९ - उठाऊ लेखनी लीखू अहाँ (कविता)

उठाऊ लेखनी लीखू अहाँ
(कविता)

उठाऊ लेखनी,  लीखू अहाँ,  जे किछु नञि लीखल गेल ।
नञि लीखब तँऽ ढोल ने पीटू - किछु नञि लीखल गेल ।।

गीत - गजल,  सभ किछु लीखू ।
नञि लीखलन्हि ओ, अपने लीखू ।
गीता - गुरुग्रण्थ - कुरान  लीखू ।
बाइबल - जातक  वा आन लीखू ।
ओ सभ लीखू, जे अछि इच्छा, लीखल - ने लीखल गेल ।
नञि लीखब तँऽ ढोल ने पीटू - किछु नञि लीखल गेल ।।

इतिहास लीखू,  भूगोल लीखू ।
विज्ञान लीखू,  खगोल लीखू ।
अनुवाद लीखू वा मूल लीखू ।
अपना भाषा लए खूब लीखू ।
अहँक हाथ  के अछि धएने - नञि हुनिका लीखल भेल ।
नञि लीखब तँऽ ढोल ने पीटू - किछु नञि लीखल गेल ।।

अहँ नञि लीखबै आ नञि पढ़बै ।
अनका फेर  दोष  किएक मढ़बै ।
पोथी आ पत्रिका  नञि  कीनबै ।
तँऽ  अपने  मूँह  कोना  बजबै ।
की भेल ?  अहाँ की सोचै छी ?  ई दुविधा केहेन भेल ?
नञि लीखब तँऽ ढोल ने पीटू - किछु नञि लीखल गेल ।।

ओतबहि करियौ  सामर्थ्य जतेक ।
जुनि सोचू अहँ कऽ सकब कतेक ।
घएला भरबा लए  बुन्न  जतेक ।
हर एक प्रयास केर मोल ओतेक ।
जुनि किछु सोचू,  झट लऽ बैसू,  लीखू जे  मनमे भेल ।
नञि लीखब तँऽ ढोल ने पीटू - किछु नञि लीखल गेल ।।

अहँक कथा केओ नञि लीखत ।
अहँक व्यथा केओ नञि लीखत ।
जञो लीखत तँऽ तुक्का लीखत ।
अपनहि लीखब, पक्का लीखब ।
अहँकेर अधिकार अहँक लीखब, से छीनि कोना केओ लेत ।
नञि लीखब तँऽ ढोल ने पीटू - किछु नञि लीखल गेल ।।

साहित्य - मैथिली सभकेर अछि ।
हर जाति - धरमसँ  ऊपर अछि ।
आनहु भाषी केर  स्वागत अछि ।
हमरहु  साहित्यमे  सागर अछि ।
हम अहँक पढ़ी, अहँ हमर पढ़ी, इएह सुसम्बन्ध आ मेल ।
नञि लीखब तँऽ ढोल ने पीटू - किछु नञि लीखल गेल ।।




मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍190म अंक (‍15 नवम्बर 2015) (वर्ष 8, मास 95, अंक ‍190) मे प्रकाशित ।



Friday, 16 October 2015

पद्य - ‍१‍१८ - बनल मधेश मसान छै (गीत)

बनल मधेश मसान छै (गीत)

छायाचित्र सौजन्य - श्री पशुपतिनाथ मधेशीजीक वॉलसँ साभार
मारल  गेलै  लोक  कतेको,  बनल मधेश मसान छै ।

मारल  गेलै  लोक  कतेको,  बनल मधेश मसान छै ।
केहेन  छै    प्रजातन्त्र    केहेन  संविधान  छै !!

राजतन्त्रमे  भेदभाव - ओहि ठामक लोक  कहए छल ।
सम अधिकारक लेल प्रजातन्त्रक ओ बाट ताकए छल ।
आइ दिवस ओ एलै मुदा, बखड़ा नञि एक समान छै ।
केहेन  छै    प्रजातन्त्र    केहेन  संविधान  छै !!

अधिकारक जे माँग कएलक,  से गोलीक भेल शिकार ।
शोणितमय शुरुआत जकर, तक्कर भविष्य की आश ?
दूमेसँ हर एक व्यक्ति, जक्कर दहीन नञि - बाम छै ।
केहेन  छै    प्रजातन्त्र    केहेन  संविधान  छै !!

देश स्वतन्त्र ओ भिन्न  मुदा  भारतक सहोदर भाए ।
सएह सोचि  भारत कहलक,  करू संकट केर उपाए ।
भारत केर हित वचनकेँ उनटे, बूझए ओ अपमान छै ।
केहेन  छै    प्रजातन्त्र    केहेन  संविधान  छै !!

एक  देशमे  दू - नागरिकता,  जखन - जतए भेलैए ।
साक्षी अछि इतिहासे - ओक्कर  अप्पन अहित भेलैए ।
देश माए आ माएक लेल तँऽ सुन्नर सभ सन्तान छै ।
केहेन  छै    प्रजातन्त्र    केहेन  संविधान  छै !!


16 अक्टूबर 2015  कऽ प्रकाशनार्थ विदेह - पाक्षिक मैथिली ई पत्रिका केर सम्पादकीय कार्यालयकेँ प्रेषित ।



मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍190म अंक (‍15 नवम्बर 2015) (वर्ष 8, मास 95, अंक ‍190) मे प्रकाशित । 

28 नवम्बर 2015 कऽ श्रीमति प्रेमलता मिश्र 'प्रेम'जीक पटना आवास पर आयोजित "सान्ध्य गोष्ठी"मे प्रस्तुति ।