Pages

मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Thursday, 29 September 2016

पद्य - ‍२‍१० - चीता (बाल कविता)

चीता (बाल कविता)




चित्रकाय - चीता प्रशिद्ध अछि,
भारत  भरिमे  भेल  विलुप्त ।
संस्कृतक  अछि  देल   नाँओ,
पर संस्कृतक  क्षेत्रहिसँ लुप्त ।।*‍१

भारतीय चीता  बाँचल अछि,
अगबहि    आब    ईरानमे ।
किछु केर  आशा छी  एखनहु,
ओ   भेटत  बलुचिस्तानमे ।।*

ईरानक चीता    ओएह   बूझू,
जे  छल  भारत केर  चीता ।
भारत  आ  भारतसँ पच्छिम,
एसियामे छल  इएह चीता ।।*

चीता केर  इएह  एक प्रजाति,
छल एसियाक सभ टा चीता ।
बाँकी  चारि  प्रजाति  शेष जे,
अफ्रिकाक से  अछि  चीता ।।*

जतबा  धरतीक  जन्तु एखन,
स्थलमंडल पर विचरैत अछि ।
सभसँ   बेसी  त्वरित  वेगसँ,
चीतहि टा बस दौड़ैत अछि ।।*

बाघ-सिंह-तेन्दुआ  जे अछि से,
प्रायः     रातिचर    प्राणी ।
जगुआरक दिन - राति समानेँ,
चीता     दिनचर    प्राणी ।।*

अल्प  समयमे  त्वरित  वेगसँ,
करैछ     खेहारि    शिकार ।
बारहसिंघा,  हरीन,   नीलगाए,
खढ़िआ    आदि    शिकार ।।

अल्प  समयमे  त्वरित  वेगसँ,
हकमि  जाइत  अछि  चीता ।
कए शिकार,  नञि खाऽ सकैछ,
ओ  आधा - पओने   घण्टा ।।*

निर्बल ओ असहाय  देखि कऽ,
आन    उठाबैछ    फायदा ।
मारल  शिकारकेँ  लए भागैछ,
चीता आ सिंह - लकड़बग्घा ।।*

भूखल चीता  उठैछ पुनः आ,
फेरहु     करैछ    शिकार ।
जँ तकदीर नीक एहि बेर तँऽ,
बनैछ    शिकार - आहार ।।

भारतीय - चीता    भारतमे,
करए     फेरसँ     बास ।
तकर व्योंतमे  अछि लागल,
आब भारत  केर  सरकार ।।

देशक ई भोतिआएल धरोहरि,
प्राप्तिक   होइछ   प्रयास ।
जतन भऽ रहल भारत-भू पर,
चीताक    हो    पुनर्बास ।।*




संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - संस्कृतक चित्रक वा चित्रकाय शब्दसँ चीता शब्दक उत्पत्ति भेल अछि । मुदा भारतीय चीता आब भारतसँ विलुप्त (EXTINCT) भऽ चुकल अछि ।

* - भारतीय चीता एखन मात्र ईरान देशमे बाँचल अछि आ तेँ ओकरा आब ईरानी चीता कहि सम्बोधित कयल जाइत अछि । किछु लोकक कहब अछि जे भारतीय चीता बलुचिस्तानमे सेहो बाँचल भऽ सकैत अछि मुदा तकर पुष्टिक लेल कोनहु वैज्ञानिक अध्ययन नञि कयल गेल अछि ।

* - जिबैत चीताक कुल पाँच प्रजाति (SUB SPECIES) अछि । पहिल प्रजाति एसिया महाद्वीपमे भेटए बला भारतीय या ईरानी चीता अछि आ शेष चारिटा प्रजाति अफ्रिका महाद्वीपमे पाओल जाइत अछि ।

* - बाघ, सिंह आ तेनुआ आदिक विपरीत चीता मुख्यतः दिनचर जन्तु अछि आ दिनहिमे शिकार करैत अछि । चीता अपन घ्राण शक्ति वा सुँघबाक शक्तिक आधार पर नञि अपितु दृष्टि वा देखबाक क्षमताक बलेँ शिकार करैत अछि ।

*- चीता बहुत कम समयावधिमे बहुत बेसी गति धरि पहुँचि सकैत अछि । गति पकड़बाक एहि त्वरित प्रक्रियाक कारणेँ चीताक त्वरण (ACCELERATION) धरती पर विचरण कएनिहार जन्तुसभमे सभसँ बेसी अछि । शिकार करबा काल चीताक औसत गति (AVARAGE SPEED) 64 कि॰मि॰ प्रति घण्टा रहैत अछिपर शुरुआति गति 112 कि॰मि॰ प्रति घण्टा धरि भऽ सकैत अछि । गति पकड़बाक एहि त्वरित प्रक्रिया अर्थात अत्यधिक त्वरणक कारणेँ चीताक शरीर बहुत बेसी गर्म भऽ जाइत अछि जाहिसँ चीता बहुत बेसी थाकि जाइत अछि । ओ एतबा थाकि जाइत अछि जे अपन पकड़ल शिकारकेँ अपना सोझाँमे राखि आधा - पओन घण्टा सुस्ताइत अछि आ तकरा बादहि ओ एहि शिकारकेँ खाइत अछि । बहुधा ओकर क्लांति वा हकमीक फायदा आन मांसाहारी जन्तुसभ (यथा - आन चीता, बाघ, सिंह, लकड़बग्घा, हुड़ार आदि) उठबैत अछि आ सुस्ताइत चीताक सोझाँसँ ओकर शिकार लऽ कऽ भागि जाइत अछि आ बेचारा चीता विवश भऽ से देखैत रहि जाइत अछि ।




*- भारतीय चीताकेँ ईरानसँ आनि फेरसँ भारत जंगलसभमे पुनर्वासित करबाक प्रयास भारत सरकार द्वारा कएल जा रहल अछि ।
*अंग्रेजीक पॅन्थर (PANTHER) शब्द चीताक अतिरिक्त तेनुआ ओ जगुआर लेल सेहो प्रयुक्त होइत अछि ।


मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍210म अंक (‍15 सितम्बर 2016) (वर्ष 9, मास 105, अंक ‍210) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।





No comments:

Post a Comment