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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Sunday, 1 February 2015

पद्य - ‍१०‍१ - माघ (कविता)

माघ (कविता)



सिहकैत  बसात, ठिठुरैत  माघ ।
ओसक टप्-टप्, कानए अकास ।।

सभ आढ़ि - धूर पर उगल घास ।
ओसेँ  भीजल,  पिछड़ैत   लात ।।

ओसेँ भीजल अछि गाछ - पात ।
टप् - टप् भू पर पानिक प्रपात ।।

पर ओस चाटि की मेटए प्यास ?
एकटा अछार  एखनो छै आश ।।

पछता गहूम  केर  हो ने नाश ।
तेँ दमकलसँ अछि पटैत चास ।।

नाला - पौती अछि बितल बात ।
प्लास्टिकक पाइप संबल उसास ।।

अजगर सनि पसरल  बीच बाध ।
फक् फक् करैत दमकलक साथ ।।

गमछा - मफलर  बन्हने  गाँती ।
चद्दरि – सोएटर  झँपने  छाती ।।

निकलल – जकरा भोरे छै काज ।
काजक  बदलामे  नञि छै लाथ ।।

शीतलहरी   पूसहु   केर   बाद ।
नञि जानि कते दिन रहत आब ।।

कनकनी  एहेन   कँपबैछ  हाड़ ।
तइयो   धड़फड़मे    घटकराज ।।

एहनोमे   धोएबा   लेल   पाप ।
जा  रहल  लोक  दौगल प्रयाग ।।




01 FEB. 2015  कऽ प्रकाशनार्थ विदेह - पाक्षिक मैथिली ई पत्रिका केर सम्पादकीय कार्यालयकेँ प्रेषित ।


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