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मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

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Saturday, 4 March 2017

पद्य - ‍२‍३४ - घोरन (बाल कविता)

घोरन (बाल कविता)





चुट्टी सनि छी   वा चुट्टी छी,
चुट्टीसँ  किछु  भिन्नहु छी ।
चुट्टा सनि  छी  रूप  मुदा,
संतोला   रंगक  ई   छी ।।*‍१

आम या जामुन केर गाछ पर,
रहइछ    प्रायः    सोहरल ।
जखने केओ  चढ़ैछ  गाछ पर,
ओकरा   देहमे    लुधकल ।।

आमक गाछक पात सीबि कऽ,
गोल - गोल  खोंता  बनबए ।
चुट्टा सनि ई जीव छी घोरन,
आ  “घोरन छत्ता”  बनबए ।।*‍२

अपना  देशक  वन्य  भागमे,
जन - जातिक आहार थिकै ।
भुजिया चटनी बहुत चहटगर,
अम्मत खटगर स्वाद थिकै ।।*‍३

पात  सीबैछ,  तेँ   अंग्रेजीमे,
 ‘वीवर ऑण्ट’ छै नाम ओकर ।
‘ग्रीन’ माने जंगल सेहो होइए,
‘ग्रीन ऑण्ट’ सेहो नाम ओकर ।।*‍४





संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

*‍१ - मोटा-मोटी जँ देखी तँऽ घोरन सेहो चुट्टीएक (चुट्टीअहिक) प्रभेद छी, मुदा तथापि अपन विशिष्टताक कारणेँ ई चुट्टीसँ फराक छी ।

*‍२ - आम, जामुन आदि गाछक स्वस्थ पातकेँ सीबि (सिउबि) कऽ घोरन रहबाक लेल घऽर बनबैछ जकरा “घोरनक छत्ता” (COMB OF A WEAVER / GREEN ANT) कहल जाइत अछि । सिउब = सीअब वा सीयब; सिउबैछ = सीबैछ ।

*‍३ - अपना देशक जनजातिय भागमे आ विश्वमे आन बहुतहु ठाम घोरनकेँ भूजि कऽ वा चटनी बनाए कऽ वा आन तरहेँ खाएल जाइत अछि ।

*‍४ - पात सीबि कऽ छत्ता बनएबाक कारण अंग्रेजीमे एकरा “वीवर अण्ट” (WEAVER ANT) आ गाछ पर रहबाक कारण “ग्रीन अण्ट” (GREEN ANT) कहल जाइत अछि । एहि ठाम ग्रीन (GREEN) केर मतलब हरियर रंग नञि अछि अपितु जंगल अछि ।



मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका “विदेह” केर ‍219म अंक (‍01 जनबरी 2017) (वर्ष 10, मास 110, अंक ‍219) केर “बालानां कृते” स्तम्भमे प्रकाशित ।



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