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मिथिलाक पर्यायी नाँवसभ

मिथिलाभाषाक (मैथिलीक) बोलीसभ

Saturday, 30 April 2016

पद्य - ‍१७७ - गेंड़ा (बाल कविता)

गेंड़ा (बाल कविता)





केहेन अजगुत जीव ! − पहिरने “सूट - सफारी” ।
लागय   सेना केर वर्दीमे    भागल  वर्दीधारी ।।*

नाकक  ऊपर सिंघ एगो या दूगो* छै जनमल ।*
सिंघक* वार - प्रहार  जेना तरुआरिक सनकल ।।*

बास  ओकर,   घास   संगहि  क्षेत्र  दलदली ।*
देखितहिं देरी  सिंहहुमे  मचि जाइछ खलबली ।।*

घासहि खा कऽ जिबैत अछि ई जीव शाकाहारी ।
निर्मम वध कऽ रहल एकर सिंघ केर व्योपारी ।।*

भारत केर उत्तर आ पूब दिशि एकरहि राज छै ।
काजीरंगा - जलदापाड़ा - दुधवामे सोराज  छै ।।*

नेपालक   परसा - चितबन - बर्दिया   भूटानमे ।
भारतीय गेंड़ा बाँचल छै, एहने किछु सुठाममे ।।*

कहियो सौंसे बास छलै - सिन्धुसँ दिहांग धरि ।*
आब तँऽ बूझू बाँचल छै बङ्ग ओ असाम धरि ।।

एकसिंघी  भारत - नेपाल - भूटान आ जावा ।
दूसिंघी - गेंड़ा  भेटैतछि  अफ्रिका - सुमात्रा ।।*१०





संकेत आ किछु रोचक तथ्य -

* - गेंड़ाक शरीर पर चमरीक मोट सुरक्षात्मक स्तर होइत अछि जकर मोटाई डेढ़सँ पाँच सेन्टीमीटर धरि भऽ सकैत अछि ।

* - एगोदूगो क्रमशः एक गोटदू गोट केर संक्षिप्त रूप थिक । ठीक तहिना जेना कि अंग्रेजीक RHINO शब्द RHINOCEROS केर संक्षिप्त रूप ।

* - गेंड़ाक नाकक ऊपर एक या दू टा सिंघ होइत अछि ।

* - श्रृंग (तत्सम)  >  सिंग (अर्ध तत्सम)  >  सिंघ (तद्भव), संगहि एकसिंगही = एकसिंघी = एक सिंग/सिंघ बला  । सिंघ शब्द सिंह केर तद्भव स्वरूपमे सेहो प्रयुक्त होइत अछि । एहि तरहेँ सिंघ शब्द मैथिलीमे तद्भव शब्द भेल आ अनेकार्थक शब्द सेहो कारण एकर दू टा भिन्न अर्थ होइत अछि - पहिल श्रृंग (HORN) आ दोसर सिंह (LION)

*- सिंघ केर उपयोग गेंड़ा अपन सुरक्षा लेल करैत अछि । सिंघ जखन पैघ भऽ जाइत अछि तँऽ ओ एतेक मजगूत भऽ जाइत अछि कि ओकर प्रहारसँ गेँड़ा कोनहु मजगूत गाछकेँ सेहो तोड़ि सकैत अछि । एहि सिंघक प्रहारसँ बाघ - सिंह सेहो डऽर मानैत अछि ।

*- गेंड़ा शाकाहारी प्राणी अछि । दलदली क्षेत्र − जकर आस-पास घासक प्रचूरता हो − से गेंड़ाक प्राकृतिक आवास क्षेत्र होइत अछि ।

*- गेंड़ाक सिंघ केर तश्करी होइत अछि आ ताहि कारणेँ ओकर निर्मम अवैध हत्या कएल जाइत अछि ।

*- भारतीय गेंड़ा पहिने सम्पुर्ण उतरबारी भारतक जंगलमे पाओल जाइत छल पर आब सिर्फ किछु सुरक्षित अभ्यारण्य या निकुञ्जमे बाँचल अछि ।

*- दिहांग नदी - अरुणाचल प्रदेशमेब्रह्मपुत्र नदी केर नाँओ ।

*१० - भारत, नेपाल, भुटान, म्यांमार आ जावामे प्राकृतिक रूपसँ पाओल जाए बला गेंड़ाक नाकक ऊपर मात्र एक टा सिंघ होइत अछि जखनि कि अफ्रिका महादेश आ सुमात्रामे पाओल जाए बला गेंड़ाक नाकक ऊपर दू टा सिंघ होइत अछि ।


दू आखर हुनिका लेल जनिका सिंग केर एवजमे सिंघ नञि रुचैत हो -

(एहि अंशकेँ प्रकाशित करबाक वा नञि करबाक पुर्ण अधिकार सम्पादक महोदयकेँ छन्हि । चाहथि तँऽ ओ एहि अंशकेँ बालानां कृतेसँ अलग आन ठाम कतहु स्थान दऽ सकैत छथि ।)

Ø सिंग सही कि सिंघ ? - एहि तरहक प्रश्न करब अनुचित ।

Ø भाषाशास्त्री लोकनिक एहि तरहक प्रश्न गलत ओ अपुर्ण अछि ।

Ø प्रश्न होयबाक चाही कि सिंगसिंघ जँ दुहु मैथिलीक शब्द थिक तँ ओहिमे भाषाशास्त्रीय दृष्टिकोणसँ की अन्तर ?

Ø अथवा, प्रश्न होयबाक चाही कि ओ दुहु शब्द भाषाशास्त्रक कोन आधार पर मैथिलीक शब्द भेल ? (एहि प्रश्नक उतारा हम ऊपरमे देबाक प्रयास कएल अछि) ।

Ø हम आओर अहाँ अपना मान्यताक आधार पर के होइत छी सही-गलत केर प्रमाण पत्र देनिहार/रि ?

Ø मैथिलीक जँ वास्तवमे हित चाहैत छी तँऽ मैथिलीक भाषाशास्त्री ओ व्याकरणाचार्य लोकनिकेँ आन भाषाक भाषाशास्त्री ओ व्याकरणाचार्य लोकनि जेकाँ समावेशी होअए पड़तन्हि आ एकहरबा वा एकढ़बा बनबाक प्रवृत्तिक त्याग करए पड़तन्हि । ठीक तहिना जेना अंग्रेजी मे COLOUR सेहो सही अछि आ COLOR सेहो सही । LEUCOCYTE सेहो सही अछि LUCOCYTE सेहो सही आ LUKOCYTE सेहो सही ।

Ø आनहु भाषा यथा हिन्दी, भोजपुरी, मगही, मराठी, बाङ्ग्ला आदिमे ई समावेशी नीति अपनाओल जा रहल अछि । यथा हिन्दीक एकटा उदाहरण नीचाँक दुहु चित्रमे देखू -






Ø केओ कहैत छथि हम मात्र संस्कृतनिष्ठ शब्दकेँ मैथिली मानैत छी । केओ कहैत छथि हम मात्र कें मैथिली बुझैत छी केँ नञि । यौ (अओ,औ) ! अहाँक अहाँक मानब ओ बूझब अहाँक अप्पन मोनक बात छी, ओ सभ पर नञि थोपल जा सकैत अछि । जँ सएह करबाक छल तँऽ कथी लेल मैथिली वर्णमालाकेँ मैथिली व्याकरणमे स्थान देल आ ताहि वर्णमालामे किएक विराजित अछि ? आओर किएक पढ़बैत छिऐ जे उद्गमक आधार पर शब्द मुख्यतः चारि प्रकारक होइत अछि - तत्सम, तद्भव, देशज ओ विदेशज ?

Ø कोनहु जिबैत भाषा सतत प्रवाहमान नदी जेकाँ होइत अछि । ओएह नदी जिबैत अछि जे सतत प्रवाहमान होइत अछि आ अपना दुहु किनारीक माटिकेँ काटि अपनामे भँसिआए (भँसिआऽ), अपना धारक संग बहाए (बहाऽ) आगाँ बढ़बाक सामर्थ्य रखैत अछि । जाहि नदीमे से सामर्थ्य नञि ओ क्रमिक रूपेँ सुखाए (सुखाऽ) जाइत अछि आ अन्ततः मृत भए (भऽ) जाइत अछि ।


Ø कोनहु जिबैत भाषाक व्याकरण सतत समावेशी होइत अछि आ कालक्रमेण धीरे-धीरे ओहिमे किछु-किछु सकारात्मक परिवर्तन होइत रहैत अछि । शेक्सपियरकालसँ एखन धरिक अंग्रेजी व्याकरणक अध्ययन अपने कऽ सकैत छी ।

मैथिली पाक्षिक इण्टरनेट पत्रिका विदेह केर ‍199म अंक (‍15 अप्रील 2016) (वर्ष 9, मास 100, अंक ‍199) केर बालानां कृते स्तम्भमे प्रकाशित ।

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